फतेहाबाद। गांव खाबड़ा कलां में रुके हुए बारिश के पानी काे निकालने के लिए अब पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। तीन करोड़ की लागत से इस परियोजना पर कार्य किया जाएगा और इसके लिए सिंचाई विभाग ने एस्टीमेट भी तैयार कर लिया है। वहीं, बड़ोपल व खाबड़ा कलां में सेम के पानी को निकालने के लिए दो प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इनके टेंडर हो चुके हैं और टेंडर पास होने के बाद सेम के पानी को निकालने का कार्य शुरू किया जाएगा।
फतेहाबाद हलके में छह गांव फतेहाबाद व आठ गांव भट्टू कलां के सबसे अधिक सेम व बारिश के पानी के ठहराव के कारण प्रभावित हैं। गांव खाबड़ा कलां में बारिश के पानी का ठहराव अधिक रहता है। यहां पर बारिश का पानी कई महीनों तक जमा रहता है और खेतों में फसलों को भारी नुकसान होता है। इसी को देखते हुए सिंचाई विभाग ने अब खाबड़ा कलां के लिए पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। तीन करोड़ की लागत से यहां पर अंडर ग्राउंड पाइप लाइन बिछाई जाएगी और यह पानी सीधा हिसार ड्रेनेज में जाएगा। जिससे पानी की निकासी जल्द से जल्द हो जाएगी। जल्द ही इस पर काम होना शुरू हो जाएगा।
बड़ोपल में 2 करोड़ 85 लाख खर्च होंगे
वहीं, दूसरी ओर कृषि विभाग की ओर से गांव बड़ोपल व खाबड़ा कलां में सेम का पानी निकालने का प्रोसेस तैयार कर लिया गया है। बड़ोपल में सेम का पानी निकालने के लिए दो करोड़ 85 लाख व खाबड़ा कलां में दो करोड़ 71 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके बाद सेम ग्रस्त इलाकों में बोर लगाए जाएंगे। वहीं जो पानी चार से पांच फुट जमीन के नीचे है, उसे पाइपों के माध्यम से निकालकर बड़ी नहरों में डाला जाएगा। पानी निकलने के बाद इन खेतों में पानी का स्तर नीचे चला जाएगा और बारिश के दौरान क्षारीय पानी मीठे पानी में मिलकर मीठा हो जाएगा। इससे लवणीय धरती को फायदा होगा। ज्ञात रहे कि फतेहाबाद क्षेत्र में 15 हजार एकड़ का रकबा सेम ग्रस्त है।
गांव खाबड़ा कलां में बारिश के पानी को निकालने के लिए पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। तीन करोड़ की लागत से यहां पर पाइप लाइनों को बिछाकर हिसार ड्रेन में डाला जाएगा। इससे पानी जल्द ही खेतों से निकल जाएगा। इसके बाद अन्य गांवों को शामिल किया जाएगा।
-मनदीप बेनीवाल, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग
गांव बड़ोपल व खाबड़ा कलां में फिलहाल सेम के पानी को निकालने के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है और यह प्रोसेस में है। प्रोजेक्ट बड़ा है, इसलिए इसमें समय लग सकता है। सेम के पानी को पाइपों के माध्यम से नहर में डाला जाएगा, वहीं पर 16 बोर लगाए जाएंगे ताकि पानी जमीन के नीचे चला जाए।
-बिजेंद्र सिंह, एएससीओ, कृषि विभाग, फतेहाबाद