निजी स्कूल संचालकों द्वारा पत्रकार वार्ता कर फीस मांगने के दो दिन बाद ही अब अभिभावकों ने भी मोर्चा खोल दिया है। इस मामले में विभिन्न अभिभावकों ने एक पेरेंट्स एसोएशिन का गठन कर दिया है और रविवार सुबह जगजीवनपुरा स्थित दीन दयाल उपाध्याय पार्क में इस एसोसिएशन की पहली बैठक हुई । बैठक के बाद अभिभावकों ने निजी स्कूल संचालकों को दो टूक जवाब देते हुए नो स्कूल-नो फीस का निर्णय सर्वसम्मति से पास कर दिया। इतना ही नहीं, पेरेंट्स एसोसिएशन के सदस्यों ने मौके पर पहुंचे खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश शर्मा को सीएम के नाम ज्ञापन भी सौंपा। कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल कराने का भी निर्णय बैठक के दौरान लिया। हालांकि उन्होंने सरकार से ये जरूर मांग रखी कि सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों की तरह सुविधाएं दी जाएं, इससे अभिभावक खुद ही सरकारी स्कूल की ओर अग्रसर होंगे। बैठक की अध्यक्षता सुनील दीक्षित व सुशील बिश्रोई एडवोकेट व सौरभ मेहता ने की। इनके अलावा गुलशन होटलवाले, एडवोकेट सुशील बिश्नोई, रितेश कुमार, सुभाष सोखल, पंकज कुक्कड़, सुरेंद्र पूनिया व सिमरनजीत सिंह आदि बैठक में मौजूद रहे।
बैठक में सुनील दीक्षित ने कहा कि अगर सरकार सरकारी स्कूलों में सुविधाएं देने में फिलहाल सक्षम नहीं है तो उसे निजी स्कूलों को आदेश देना चाहिए कि एडमिशन चार्ज, एनुअल चार्ज व अप्रैल, मई और जून माह की फीस माफ करें। बैठक में मौजूद अभिभावकों ने एलान किया कि लॉकडाउन की अवधि तक की फीस कोई भी अभिभावक स्कूलों में जमा नहीं करवाएगा। इसके अलावा बैठक में शामिल हुए अभिभावकों ने ये भी मांग रखी है कि फीस माफ ना करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ प्रदेश सरकार तुरंत कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि फतेहाबाद जिले के निजी स्कूलों द्वारा फार्म छह में दी गई स्कूल फीस व ट्यूशन फीस की जांच करवाई जाए और फार्म-छह में दी गई जानकारी के अनुसार ही फीस ली जाए। लॉकडाउन के दौरान कोई भी निजी स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा कोई और चार्जिज वसूली करता है तो उस स्कूल की मान्यता रद की जाए। बैठक के दौरान शहर के अनेक अभिभावक मौजूद रहे।
सुरक्षा व सामाजिक दूरी के मदद्ेनजर एसएचओ खुद रहे ड्यूटी पर तैनात
पेरेंट्स एसोएशिन द्वारा एक दिन पहले ही सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर अभिभावकों को जगजीवनपुरा पार्क में बैठक के लिए आमंत्रित किया था। जिसके चलते पुलिस टीम पहले ही वहां पहुंच गई ताकि सोशल डिस्टेसिंग का पालन हो सके। इस बैठक को लेकर पुलिस प्रशासन इतना गंभीर था कि खुद एसएचओ यादविंद्र सिंह पार्क में तैनात थे। वो बैठक शुरू होने से पहले ही पार्क में पहुंच गए थे और लगभग डेढ़ घंटे की बैठक खत्म होने के बाद सभी को पार्क से बाहर भेजकर ही वो वहां से निकले।
कई सरकारी लेक्चरर भी बैठक में पहुंचे, बच्चों की फीस माफी का उठाया पोस्टर
अभिभावकों की इस बैठक में सरकारी स्कूलों के भी कई लेक्चरर शामिल हुए। बता दें कि जिस तरह से निजी स्कूलों के अध्यापक ऑनलाइन तरीके से बच्चों को पढ़ा रहे हैं उसी तरह से सरकारी स्कूलों के अध्यापक भी ऑनलाइन ही पढ़ाई करवा रहे हैं। इसके अलावा उनकी तनख्वाह भी पचास-पचास हजार से अधिक ही रही है जबकि सरकार ने लॉकडाउन में घर पर रहे अध्यापकों को भी पूरी सैलरी दी है। ऐसे कई लेक्चरर भी बैठक के दौरान बच्चों की फीस माफी का पोस्टर उठाए दिखे।