रतिया। दो बार अतिरिक्त उपायुक्त राहुल मोदी के न होने से सिरे नहीं चढ़ी रतिया पंचायत समिति चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली बैठक आखिरकार शुक्रवार को पूर्ण हो गई। कोरम पूरा नहीं होने के चलते पंचायत समिति चेयरमैन के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया।
सत्ता पक्ष के भारी दबाव के बावजूद कांग्रेस समर्थित पंचायत समिति चेयरमैन अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहे। अतिरिक्त उपायुक्त एवं पंचायत समिति रतिया के प्रीजाइडिंग अथॉरिटी राहुल मोदी ने बताया कि बैठक में निर्धारित समय सुबह 10 से साढ़े 10 बजे तक पंचायत समिति रतिया के कुल 22 सदस्यों में से चेयरमैन केवल कृष्ण के अतिरिक्त 12 सदस्य ही हाजिर हुए। जिस कारण बैठक के लिए कोरम पूरा नहीं हो पाया।
उन्होंने बताया कि हरियाणा पंचायत राज अधिनियम 1995 के नियम दस के उप नियम 5 में यह प्रावधान है कि यदि बैठक बुलाने के निश्चित समय के आधे घंटे के बाद तक निर्धारित कोरम नहीं होता है तो यह बैठक समाप्त मानी जाती है और इसका नोटिस समाप्त हो जाता है। वहीं अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद केवल मेहता कांग्रेस विधायक जरनैल सिंह के साथ बैठक रूम से बाहर निकले।
विधायक जरनैल सिंह ने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह की राजनीति नहीं की जानी चाहिए। भाजपा सरकार लोकतंत्र की जगह तानाशाही से जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को हटाना चाहती है तथा बदले की राजनीति कर रही है। भाजपा को इस तरह की ओछी राजनीति नहीं करनी चाहिए।
जिन लोगों ने साजिश रची, उनको बाज आना चाहिए : केवल मेहता
पंचायत समिति चेयरमैन केवल मेहता ने अपने कार्यालय में समर्थित पंचायत समिति सदस्यों के साथ मिलकर कहा कि उनके खिलाफ जिन लोगों ने साजिश रची थी, उन्हें इस तरह की राजनीति करने से बाज आना चाहिए। सच्चाई की हमेशा जीत होती है और वह बिना भेदभाव के एक समान कार्य करवाने में विश्वास रखते हैं। आगे भी इसी तरह कार्य जारी रहेंगे। सत्ता पक्ष के दबाव में जिस तरह से प्रशासनिक अधिकारियों ने उनके खिलाफ झूठ मामले दर्ज करने सहित अन्य कार्रवाई की है, उसको लेकर वह अदालत में जाएंगे। उन अधिकारियों व अन्य लोगों के खिलाफ मानहानि सहित अन्य कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि वीरवार को भी उनके समर्थित सदस्यों को विरोधियों द्वारा काफी धमकाया गया, लेकिन उनके समर्थित सदस्यों ने सच्चाई का साथ दिया, जिसके चलते न्याय की जीत हुई। केवल मेहता ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों ने दो बार दबाव के चलते बैठक को स्थगित किया लेकिन आज की बैठक भी रद्द न हो, इसके लिए उन्होंने हाईकोर्ट के माध्यम से प्रशासन को पहले ही बाउंड करवा लिया था। इसके चलते ही प्रशासन को बैठक करवानी पड़ी।
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क्या था मामला
बता दें कि 17 नवंबर को पंचायत समिति रतिया के कुल 22 में से 16 सदस्यों ने उपायुक्त को चेयरमैन के विरुद्ध अविश्वास का नोटिस दिया था। उपायुक्त ने अतिरिक्त उपायुक्त राहुल मोदी की अध्यक्षता में पहले 4 दिसंबर को अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ मतदान की तिथि निश्चित की थी, लेकिन ऐन मौके पर एडीसी किसी बैठक में भाग लेने चंडीगढ़ चले गए। इसके बाद 3 जनवरी शाम 4 बजे मतदान की तिथि निर्धारित की गई। मगर उस दिन दोपहर को पंचायत समिति सदस्यों को बिना कोई कारण बताए बैठक स्थगित होने की सूचना दी गई।
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16 सदस्यों ने दिया था अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, चेयरमैन ने 10 अपने साथ जोड़ लिए
हालांकि, जब पंचायत समिति सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव को लेकर उपायुक्त को नोटिस दिया था, उस समय 22 में से 16 पंचायत समिति सदस्य मौजूद रहे थे। मगर बाद में केवल मेहता ने राजनीति के खेल में विरोधियों को मात देते हुए 10 सदस्यों को अपने साथ जोड़ लिया। विपक्ष के पास 12 सदस्य बचने के चलते कोरम अधूरा रह गया और अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया।
चेयरमैन के खिलाफ अपहरण का मामला भी करवाया दर्ज
रतिया पंचायत समिति चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कई नाटकीय घटनाक्रम भी सामने आए। एक पंचायत समिति सदस्य नवीन के भाई ने चेयरमैन के खिलाफ नवीन के अपहरण का आरोप लगाते हुए एफआईआर भी दर्ज करवा दी थी। दूसरे ही दिन समिति सदस्य नवीन मीडिया के सामने आए और कहा कि वह काम के सिलसिले में गुरुग्राम गए थे, उनका अपहरण नहीं हुआ था।