रतिया/फतेहाबाद। नगर पालिका रतिया की चेयरपर्सन प्रीति खन्ना व उपाध्यक्ष जोगिंदर नंदा के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव कोरम पूरा नहीं होने कारण खारिज हो गया। इसके चलते दोनों की कुर्सी बच गई है।
वीरवार को लघु सचिवालय के कमरा नंबर 32 में दोपहर 3 बजे अतिरिक्त उपायुक्त अनुराग ढालिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में अविश्वास प्रस्ताव पास करने के लिए प्रधान के खिलाफ 14 तथा उप प्रधान के खिलाफ 12 पार्षदों की जरूरत थी, लेकिन बैठक में निर्धारित समय तक 11 ही पहुंचे। जिसके चलते एडीसी अनुराग ने अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने की घोषणा की। ढालिया ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव पारित करने को लेकर पूर्ण बहुमत न होने पर वोटिंग करवाई जानी जरूरी नहीं होती। निर्धारित समय के बाद अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में बहुमत न होने के चलते इसे खारिज कर दिया गया है। बैठक में गुरप्रीत गोपी, विजय गर्ग, अजमेर सिंह, गौरव शर्मा, अजय गुप्ता, सतपाल सिंह, रेखा रानी, नीरू बाला, गुरविंदर सिंह, सुमन देवी, पिंकी रानी, सहित 11 पार्षद ही बैठक में पहुचे।
सच्चाई की जीत
अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने पर नगर पालिका प्रधान प्रीति खन्ना व उप प्रधान जोगिंदर नंदा ने कहा कि विरोधी पार्षद विकास कार्य को अटकाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहे थे, लेकिन आज सच्चाई की जीत हुई है। उन्होंने कहा कि वह विकास कार्यों को प्राथमिकता देने वाले पार्षदों को साथ लेकर क्षेत्र का चौमुखी विकास करवाएंगे।
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सरकार में प्रशासन के दबाव में अविश्वास प्रस्ताव गिरा
अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में बैठक में पहुंचे पार्षद सतपाल, गुरप्रीत, अजमेर, विजय व अन्य पार्षदों ने कहा की नगर पालिका में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ व शहर में विकास कार्य करवाने को लेकर ही वे अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए थे लेकिन सरकार व प्रशासन के दबाव में कुछ पार्षद बैठक में नहीं पहुंचे। पार्षदों ने दूसरा विचित्र कारण भी बताया कि कई पार्षद रतिया क्षेत्र में सड़क खराब होने कारण भी निर्धारित समय में नहीं पहुंच सके। उन्होंने कहा कि वह नगर पालिका में भ्रष्टाचार की लड़ाई व क्षेत्र में विकास को लेकर आगे भी लड़ाई जारी रखेंगे।
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ये था मामला
नगर पालिका के 17 में से 14 कांग्रेस पार्षदों ने 4 मार्च को नगर पालिका प्रधान प्रीति खन्ना व उप प्रधान जोगिंदर नंदा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए उपायुक्त से मिलने फतेहाबाद पहुंचे थे। हालांकि उपायुक्त के व्यस्त होने के चलते उनके कार्यालय में अपने शपथ पत्र देकर जल्द से जल्द अविश्वास प्रस्ताव की तारीख देने की मांग थी। विरोधी पार्षदों ने दो बार फतेहाबाद डीसी से मिलने की कोशिश की लेकिन उन्होंने उनको समय नहीं दिया। इसके बाद पार्षदों ने 7 मई को हाईकोर्ट की शरण ली। बताया गया है कि हाई कोर्ट ने उपायुक्त को 8 मई को इस मामले में अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट के इस मामले में दखल देने के बाद उपायुक्त ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने से पहले ही 7 मई देर शाम को पत्र जारी कर 22 मई को अविश्वास प्रस्ताव के बारे में बैठक करवाने के निर्देश दे दिए।
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दरवाजे देखते रहे 11 पार्षद
लघु सचिवालय की पहली मंजिल पर स्थित बैठक कक्ष में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर चुनाव करवाने का प्रबंध प्रशासन की ओर से किया गया था। इसमें 11 पार्षद 3 बजकर 5 मिनट में ही अंदर पहुंच गए। अपनी कुर्सी पर बैठे इन पार्षदों की नजर कमरे के अंदर दाखिल होने वाले दोनों दरवाजों पर ही रही लेकिन 11 के बाद कोई भी पार्षद नहीं आया। जिसके बाद 3 बजकर 29 मिनट पर अतिरिक्त उपायुक्त ने 11 पार्षदों से पूछा कि आपके बाकी पार्षद नहीं आ रहे हैं। इस कारण कोरम पूरा नहीं हो रहा है। तब पार्षदों की ओर से 5 मिनट का ओर समय मांगा गया। जिसके बाद अतिरिक्त उपायुक्त ने समय दे दिया। फिर भी कोई पार्षद नहीं पहुंचा। जिसके बाद पार्षदों ने फिर से समय मांगा गया। जिस पर अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि प्रशासन आपके अनुसार समय नहीं देगा। 35 मिनट की प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त उपायुक्त की ओर से तीन बार नगर पालिका रतिया के कर्मचारी ओंकार को भेजकर पार्षदों को आवाजें भी लगाई गई। इस पूरी प्रकिया की वीडियोग्राफी की गई।
11 पार्षदों के कहने पर बुलाए गए थाना प्रभारी
11 पार्षद बैठक कक्ष में पहुंचे तो उन्होंने अतिरिक्त उपायुक्त से कहा कि अन्य पार्षदों पर दबाव बनाने के लिए उनका विरोधी खेमा बैठक हाल के बाहर और लघु सचिवालय के एंट्री गेट पर मौजूद है। विरोधी खेमे की ओर से आने वाले पार्षदों के साथ धक्काशाही भी की जा सकती है। पार्षदों की इस आंशका के बाद अतिरिक्त उपायुक्त की ओर से पुलिस बल को तुरंत तैनात कर दिया गया। मीटिंग हॉल के गेट पर खुद शहर थाना प्रभारी ओमप्रकाश ने मोर्चा संभाल लिया। बैठक कक्ष के बाहर खड़ी भीड़ को वहां से हटाया गया।