फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Fatehabad News: एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल विजेता प्रियंका सहित नौ खिलाड़ियों को मिलेगा 2018 की खेल नीति के तहत लाभ

विज्ञापन
विज्ञापन
फतेहाबाद। कबड्डी में देश के लिए हाल ही में चीन में हुए एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक विजेता टीम की उपकप्तान प्रियंका सहित नौ खिलाड़ियाें को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से न्याय मिला है। हाईकोर्ट ने इन सभी खिलाड़ियों को 2018 की खेल नीति के तहत ग्रुप ए की नौकरी देने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेशों में यह भी टिप्पणी की कि इस मामले में खिलाड़ियों के साथ भेदभाव किया गया है।
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार, चरखीदादरी के गांव आदमपुर डाढ़ी निवासी महिला कबड्डी खिलाड़ी प्रियंका ने वर्ष 2012 में कबड्डी वर्ल्ड कप में जीत हासिल कर गोल्ड मेडल लिया था। वर्ष 2014 में वह एशियन गेम्स में महिला कबड्डी खिलाड़ी टीम का हिस्सा थी और यहां पर भी उन्होंने गोल्ड जीता। प्रियंका को सरकार की ओर से भीम अवाॅर्ड भी मिल चुका है। वहीं हाल ही में चीन में हुई एशियन गेम्स में भी महिला कबड्डी टीम की उपकप्तान रहते हुए उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया है। उनके साथ के ही खिलाड़ियों प्रवीन, जसबीर, अनूप को कबड्डी में अर्जुन अवाॅर्ड व रेसलिंग खिलाड़ी पूजा भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं। वहीं जगपाल, नवीन कुमार, विकास, दीपक कुमार भी 2018 की खेल नीति के तहत ग्रुप ए की नौकरी के लिए लायक थे और उन्होंने खेल विभाग में नौकरी के लिए आवेदन किया था, लेकिन खेल विभाग ने उनको 2021 की खेल नीति के तहत आवेदन करने को कह दिया। इसके बाद इन खिलाड़ियों ने अपने वकील एडवोकेट आफताब खारा के मार्फत हाईकोर्ट में याचिका लगाई।

हाईकोर्ट के वकील आफताब खारा ने बताया कि सरकार ने पांच सितंबर 2018 को खेल पॉलिसी बनाई थी, जिसके तहत एशियन गेम्स या बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में गोल्ड मेडल हासिल करने वाले खिलाड़ियों को ग्रुप एक के तहत नौकरी दी जानी थी। 2021 की खेल नीति में सरकार टीम इवेंट के खिलाड़ियों के लिए यह नीति बदलते हुए इसे ग्रुप बी में कर दिया। उन्होंने बताया कि सरकार की यह नीति फरवरी 2021 में आई थी, लेकिन सरकार ने मार्च 2021 में दो खिलाड़ियों को 2018 की खेल नीति का लाभ देते हुए स्पोर्ट्स विभाग में डिप्टी डायरेक्टर लगा दिया था। वहीं इन खिलाड़ियों के आवेदन पहले से ही खेल विभाग के पास पेंडिंग पड़े थे।
विज्ञापन

इसी को आधार लेते हुए हाईकोर्ट में दलीलें दी गई और हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए कहा कि जो पॉलिसी 2018 में बनाई गई थी और उससे पहले अगर किसी खिलाड़ी ने जीत हासिल की है या जो अन्य रैंक हासिल किया है, तो इन खिलाड़ियों पर 2018 की पॉलिसी ही लागू होगी। खिलाड़ियों को इसी पॉलिसी का लाभ दिया जाए। उन्होंने इस मामले में टिप्पणी भी की कि खेल नीति के तहत खिलाड़ियों के साथ भेदभाव किया गया है और उनको 2018 की खेल नीति का ही लाभ मिलना चाहिए। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें