फतेहाबाद। घटते जलस्तर को बचाने के लिए व धान की फसल के इतर अन्य फसलों को अपनाने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा लागू की गई मेरा पानी मेरी विरासत स्कीम से किसानों का मोहभंग होता जा रहा है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल अब तक 1511 किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन कम करवाया है, जिससे यह योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। इसका एक मुख्य कारण पिछले साल नरमा की फसल को हुआ नुकसान बताया जा रहा है। नरमा की फसल में आई बीमारी व कम उत्पादन के चलते इस बार किसान धान की फसल की ओर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
हरियाणा सरकार द्वारा मेरा पानी मेेरी विरासत के नाम से एक महत्वाकांक्षी योजना लागू की थी। इस योजना के तहत राज्य के उन खंडों को शामिल किया गया था, जिसमें खेती के लिए पानी की खपत अधिक होती है। मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत सरकार ने प्रदेश के 19 ब्लॉक को शामिल किया है, जिनमें जमीन के अंदर पानी की गहराई 40 मीटर से ज्यादा है। इनमें फतेहाबाद व रतिया ब्लॉक भी शामिल है।
धान की बजाय अन्य फसलों के लिए मिलती है प्रोत्साहन राशि
सरकार ने इन क्षेत्रों में किसानों को धान की बजाय अन्य फसलें अरहर, मक्का, कपास, उड़द, मूंग, तिल या अन्य सब्जियां उगाने के लिए यह स्कीम जारी की थी, जिसके तहत किसानों को धान की पारंपरिक खेती छोड़कर अन्य फसलें उगाने पर प्रति एकड़ सात हजार रुपये दिए जाते हैं।
इस बार कम दिख रहा रुझान
मेरा पानी मेरी विरासत के लिए इस बार किसानों में रुझान कम देखा जा रहा है। पिछले साल जहां 3551 किसानों ने अपनी 7118 एकड़ जमीन के लिए मेरा पानी मेरी विरासत के लिए आवेदन किया था, वहीं इस बार अब तक मात्र 2040 किसानों ने 4622 एकड़ जमीन के लिए ही आवेदन किया है। हालांकि आवेदन करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई है, लेकिन किसानों का रुझान इस बार इस योजना की ओर कम ही दिखाई दे रहा है। संवाद
पिछले साल नरमा की फसल में बीमारियां आने से किसानों को नरमा व कपास का उत्पादन उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं मिला। वहीं, धान की फसल की ओर किसानों का अधिक ध्यान है। यही कारण है कि इस बार किसान धान की फसल की ओर अधिक ध्यान दे रहे हैं और किसान मेरा पानी मेरी विरासत योजना की ओर कम ध्यान दे रहे हैं। हालांकि किसानों को धान की फसल के अलावा अन्य फसलें प्रयोग करने के लिए कृषि विभाग की ओर से जागरूक किया जा रहा है।
राजेश सिहाग, कृषि उपनिदेशक फतेहाबाद।