हरियाणा के फतेहाबाद के गांव ढिंगसरा में अंतरजातीय प्रेम विवाह रचाने वाले धर्मबीर की आन के लिए हत्या के मामले में न्याय और अन्याय की जंग दो मामाओं के बीच में चली। एक ओर धर्मबीर के मामा रायसिंह ने पुलिस केस दर्ज करवाकर न्याय की मांग की तो दूसरी ओर धर्मबीर की पत्नी सुनीता का मामा दलबीर सिंह मुख्य आरोपी था।
करीब दो साल आठ महीने और 9 दिन बाद आखिरकार धर्मबीर की हत्या के 16 दोषियों को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. पंकज ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फतेहाबाद के 1997 में जिला बनने के 25 साल के इतिहास में यह सबसे बड़ी सजा हुई है।
निजी बस का चालक था धर्मबीर
हिसार के गांव डोभी निवासी धर्मबीर के माता व पिता का देहांत हो चुका है। धर्मबीर का एक भाई है, जो परिवार से अलग रहता है। धर्मबीर निजी बस का चालक था और आदमपुर रूट पर बस चलाता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात हिसार के गांव मंगाली निवासी सुनीता से हुई, जो अपने मामा दलबीर के घर गांव सीसवाल में रहती थी। सुनीता आदमपुर में पढ़ने के लिए जाती थी। दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ा तो उन्होंने मार्च 2018 में सिरसा के चत्तरगढ़ पट्टी क्षेत्र के मंदिर में प्रेम विवाह रचा लिया। सुनीता के प्रेम विवाह से उसका मामा दलबीर व अन्य परिजन काफी नाराज चल रहे थे।
जान का खतरा बताकर मांगी थी सुरक्षा
प्रेम विवाह रचाने के बाद सुनीता व धर्मबीर दोनों ने दलबीर सिंह व अन्य परिजनों से अपनी जान को खतरा बताते हुए पुलिस सुरक्षा मांगी थी। पुलिस ने दोनों को सेफ हाउस में भेज दिया था। विशेष बात यह है कि दोषी दलबीर सिंह ने पुलिस को कहा था कि उनको इस शादी से कोई ऐतराज नहीं है। मगर बाद में इस हत्या को अंजाम दे दिया गया।