जाखल मंडी नगर पालिका प्रधान सीमा गोयल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने से चंद घंटे पहले नपा कार्यालय में ही उनके ससुर नोहर चंद गोयल ने सोमवार को फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
घटना के बाद मृतक के बेटे मुकेश कुमार ने बताया कि पार्षदों द्वारा नाजायज ढंग से मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने, ब्लैकमेल करने व तंग करने से परेशान होकर उनके पिता ने यह कदम उठाया है। उन्होंने दोषियों को कड़ी सजा की मांग की।
इनको बताया अपनी मौत का जिम्मेदार
मृतक नोहर चंद ने लिखे सुसाइड नोट में वार्ड नंबर 1 के पार्षद हरविंद्र सिंह (लाला), वार्ड 3 से मोनिका गोयल व उसके पति अनिल कुमार व उसके जेठ सतीश भोला, वार्ड 4 से कीर्ति गोयल व उसके ससुर सीता राम मित्तल, वार्ड 6 से पार्षद गोबिंद राम, 7 से स्वाति, 8 से विक्रम, 9 से विक्रम सैनी, 10 से विकास कामरा व 11 से अमित कुमार पुत्र सुनील कुमार, वार्ड 12 से नीटी बंसल व उनके पति पुनीत बंसल गोपा को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है।
किस-किस पर लगाया पैसे हड़पने का आरोप
सुसाइड नोट में प्रधान पद के लिए वोट देने के बदले कुल 1 करोड़ 60 लाख रुपये दिए जाने का जिक्र है। जिसमें कहा है कि पार्षद हरविंद्र सिंह (लाला) वार्ड 1 ने 20 लाख, वार्ड 6 के गोबिंद और वार्ड 7 की पार्षद स्वाति ने 17 -17 लाख, वार्ड 8 के विक्रम ने 20 लाख, वार्ड 9 के विक्रम सैनी ने 23 लाख, वार्ड 11 के अमित कुमार पूर्व उपप्रधान ने 20 लाख रुपये वोट देने की एवज में हड़पे थे। बाद में भी आरोपी बार-बार ब्लैकमेल करते रहे। वहीं वार्ड 10 के पार्षद विकास कामरा पर भी 43 लाख रुपये हड़पने का आरोप है।
आरोपों को झूठा बताकर जांच की मांग
वार्ड 7 की पार्षद स्वाति ने कहा कि मृतक द्वारा पैसे हड़पने के आरोप सरासर झूठे हैं। न ही उसे ब्लैकमेल किया गया। मामले की गहनता से जांच की जानी चाहिए। जांच में हर प्रकार से सहयोग देने को तैयार हूं। वोटिंग के दिन ही इस प्रकार का हादसा होना परिवार का दबाव है या पार्षदों का इसकी निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए। यह आत्महत्या है या फिर हत्या, इसकी भी जांच की जाए।
प्रधान सीमा गोयल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अविश्वास प्रस्ताव पर लिया था स्टे
जाखल मंडी नगर पालिका कमेटी का 3 फरवरी 2019 को गठन हुआ था। इसमें कुल 13 में से 7 पार्षदों ने वार्ड 13 की पार्षद सीमा गोयल को प्रधान व 11 के पार्षद अमित कुमार को उपप्रधान बनाया था। वहीं शेष छह पार्षदों ने प्रधान पद को लेकर हुए चुनाव में हिस्सा नहीं लिया था। तभी से प्रधान सीमा गोयल के खिलाफ बगावत शुरू हो गई थी, लेकिन धीरे-धीरे जैसे ही प्रधान का 1 साल का कार्यकाल पूरा हुआ तो सहमति प्रकट करने वाले सात में से तीन पार्षदों ने विपक्षी खेमे में जाकर प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया। जिला उपायुक्त के पास जुलाई में प्रस्तुत किए अविश्वास प्रस्ताव को प्रधान सीमा गोयल ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस पर स्टे हासिल कर लिया। उच्च न्यायालय के आदेशों पर नौ पार्षदों की ओर से प्रधान के खिलाफ कार्रवाई रुक गई, जबकि उपप्रधान अमित कुमार को उसके पद से हटा दिया। प्रधान सीमा गोयल अपने पद पर बनी रहीं, लेकिन पार्षदों द्वारा की गई बगावत पर भाजपा की ओर से प्रधान सीमा रानी को साथ न मिलने पर प्रधान ने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। बगावत यहां पर भी नहीं रुकी। बगावत करने वाले पार्षदों ने डेढ़ माह पूर्व फिर से उपायुक्त के पास सरकार द्वारा जारी किए कानून में संशोधन का हवाला देते हुए फिर से अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत कर दिया। इसको लेकर अब दोबारा प्रधान पद के लिए अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय होना था। इसके लिए आज 16 अक्तूबर को नगर पालिका कार्यालय में बैठक रखी हुई थी। यहां अविश्वास प्रस्ताव को लेकर वोटिंग होनी थी, लेकिन इससे पहले ही नगरपालिका कार्यालय में प्रधान के ससुर नोहर चंद गोयल ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।