नागरिक अस्पताल का जच्चा-बच्चा वार्ड
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फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल में डिलिवरी होने के एक दिन बाद जच्चा-बच्चा की मौत होने का मामला सामने आया है। महिला की नार्मल डिलिवरी के एक दिन बाद तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई, जबकि बच्ची की सांस की दिक्कत होने के कारण उसने भी दम तोड़ दिया। मामले में जच्चा-बच्चा के परिजनों की तरफ से कोई शिकायत नहीं दी गई है। इसमें अस्पताल स्टाफ की लापरवाही यह रही है कि उन्होंने डिलिवरी होने के 48 घंटे पहले ही जच्चा को डिस्चार्ज करके घर भेज दिया। जबकि जच्चा को नार्मल डिलिवरी के बाद कम से कम 48 घंटे तक अस्पताल में रखना जरूरी है। अब उप सिविल सर्जन ने अस्पताल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मामले के मुताबिक लाजपत नगर निवासी महिला संदीप कौर की 15 जनवरी को नागरिक अस्पताल में डिलिवरी हुई थी। महिला ने लड़की को जन्म दिया था। बच्ची को सांस की दिक्कत होने के कारण उसे नर्सरी में भर्ती किया गया। 16 जनवरी दोपहर को महिला को डिस्चार्ज कर दिया गया। परिवार के लोग संदीप कौर को घर ले गए। शाम को उसकी घर पर तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद परिवार के लोग संदीप कौर को अस्पताल में लेकर आए। यहां पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक रात को बच्ची ने दम तोड़ दिया।
ये है स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन
उप सिविल सर्जन डॉ. सुनीता सोखी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन है कि नार्मल डिलिवरी में महिला को कम से कम 48 घंटे डॉक्टरों की निगरानी में रखना जरूरी है। सीजेरियन डिलिवरी में महिला को कम से कम सात दिन तक दाखिल रखना जरूरी होता है।
वर्जन
महिला की 15 जनवरी को नार्मल डिलिवरी हुई थी। 16 जनवरी दोपहर को छुट्टी लेकर परिवार के लोग ले गए थे। महिला स्वस्थ थी जबकि सांस की दिक्कत के कारण बच्ची नर्सरी में दाखिल थी। शाम को परिवार के लोग महिला को अस्पताल में मृत अवस्था में लाए हैं और रात ही बच्ची ने भी दम तोड़ दिया। कारणों का अभी पता नहीं चला है। स्टाफ को नोटिस जारी करके कारण पूछा है कि उन्होंने 48 घंटे पहले कैसे डिस्चार्ज किया। कारणों का पता लगाया जा रहा है कि मौत कैसे हुई है।
- डॉ. सुनीता सोखी, उप सिविल सर्जन फतेहाबाद।