रतिया। ओलावृष्टि और बारिश से उपमंडल के 25 से अधिक गांवों में धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन के शुरुआती आकलन में 12 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में फसल खराब होने की रिपोर्ट सामने आई है।
इनमें करीब 4500 एकड़ में 61 से 80 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान है। शनिवार रात तेज हवाओं, बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान की प्रारंभिक सर्वे रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेज दी गई है। अब किसानों को फसल खराबे का ब्योरा दर्ज करवाने के लिए पोर्टल खुलने का इंतजार है।
पोर्टल खुलने के बाद किसान खराब हुई फसल और प्रभावित रकबे का विवरण दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद पटवारी मौके पर जाकर दर्ज जानकारी का सत्यापन करेंगे और अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर मुआवजे के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
तहसीलदार बलवान सिंह ने बताया कि शुरुआती आकलन में करीब 12 हजार एकड़ क्षेत्र में फसल खराब होने की रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है। रतिया, रतनगढ़ और हड़ौली कानूनगोई क्षेत्रों के विभिन्न गांवों में नुकसान दर्ज किया गया है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार दादूपुर में करीब 1000 एकड़, हड़ौली में 1100 एकड़ और जल्लोपुर में 1100 एकड़ क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इन गांवों में 75 से 80 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान है।
अलावलवास में करीब 400 एकड़ क्षेत्र में 50 से 70 प्रतिशत तक नुकसान बताया गया है। रत्ताखेड़ा में लगभग 700 एकड़ फसल प्रभावित हुई है। यहां 50 से 60 प्रतिशत तक खराबे का अनुमान है। इसके अलावा लाली में करीब 350 एकड़, सहनाल में 400 एकड़ और मुंशीवाली में 800 एकड़ क्षेत्र में फसल को नुकसान पहुंचा है। संवाद
4500 एकड़ में 61 से 80 प्रतिशत तक नुकसान
प्रशासन के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार करीब 4500 एकड़ में 61 से 80 प्रतिशत, 2750 एकड़ में 40 से 60 प्रतिशत, 500 एकड़ में 30 से 40 प्रतिशत, 600 एकड़ में 20 से 30 प्रतिशत और 3840 एकड़ में 10 से 20 प्रतिशत तक फसल खराब होने का अनुमान है। कृषि विभाग ने भी अलग से प्रारंभिक आकलन तैयार किया है। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार दादूपुर और जल्लोपुर में 80 से 90 प्रतिशत तक, अलावलवास और रत्ताखेड़ा में 70 से 80 प्रतिशत, हड़ौली में 60 से 70 प्रतिशत तथा लाली में 40 से 50 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान है। हुकमावाली और कलोठा में 30 से 40 प्रतिशत, नथवान, अलिका और भरपूर में 20 से 30 प्रतिशत तथा जांडवाला सोत्तर और खैरपुर में 10 से 20 प्रतिशत तक फसल खराब होने की आशंका जताई गई है।