विश्व कुष्ठ रोग दिवस विशेष
फतेहाबाद। कुष्ठ रोग का समय रहते उपचार न लिया जाए तो यह दूसरे में भी फैल सकता है। शहरों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में कुष्ठ रोग के केस मिल रहे हैं। पिछले पांच सालों में जिले में 20 केस मिल चुके हैं। 6 से 12 माह तक दवाई लेना जरूरी होता है। डॉक्टरों के मुताबिक अगर कुष्ठ रोग के प्रति लोग जागरूक हो और समय रहते पूरा उपचार ले तो इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है। समय रहते दवा लेते हैं तो उपचार भी लंबा नहीं चलेगा और गंभीर रोग होने से बचा जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कुष्ठ रोग जीवाणुओं से होता है। यह त्वचा, अंगों का अंदरुनी भाग और नसों को प्रभावित करता है। यहां तक कि नसों को कमजोर बना देता है। ये किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। कुष्ठ रोगी को पूरा उपचार 6 से 12 माह तक लेना चाहिए। यदि हाथ व पैरों में सुन्नपन है तो अधिक ठंडे व गर्म से बचना चाहिए। आंखों की पलक नहीं झपकती है तो आंखों को सोते समय नरम कपड़े से ढककर रखे व रोजाना दवाई लें। पैरों में घाव हो गए हैं तो उन्हें साफ-सुथरा रखें और मरहम पट्टी करते रहें। सुन्न पैरों व घाव वाले पैरों में एमडीटी जूते-चप्पल ही पहनें।
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कुष्ठ रोग के लक्षण
- चमड़ी पर एक या अनेक दाग धब्बे, जिनमें सुन्नपन हो।
- छूने या दर्द का अहसास नहीं होता है।
- शरीर पर किसी जगह हो सकता है।
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अब तक ये मिले मरीज
वर्ष मरीज मिले
2019-20 5
2020-21 3
2021-22 4
2022-23 6
2023-24 2
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स्क्रीनिंग को लेकर करवाई गई है ट्रेनिंग : डॉ. विष्णु
कुष्ठ रोग रोगाणुओं के कारण होता है। यह कोई अभिशाप नहीं है। यह रोग एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संचारित नहीं होता है। कुष्ठ रोग 6 से 12 माह तक दवाइयां लेने से ठीक हो जाता है। कोई शारीरिक विकृति नहीं आती है और अन्य व्यक्तियों में संचारित नहीं होता है। कुष्ठ रोग को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्क्रीनिंग की जाती है। पिछले दिनों स्वास्थ्य अधिकारियों की ट्रेनिंग भी करवाई गई है।
- डॉ. विष्णु मित्तल, जिला महामारी रोकथाम विशेषज्ञ