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मोबाइल बिगाड़ रहा बच्चों की आदतें, ग्रोथ पर भी असर

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नागरिक अस्पताल में बच्चे की जांच करतीं चिकित्सक। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। बच्चों के विकास में रुकावट का सबसे बड़ा कारण मोबाइल फोन बना हुआ है। बच्चे समय पर बोलना नहीं सीख पा रहे हैं और यहां तक कि घंटों स्क्रीन पर रहने चिढ़ चिड़ापन आ रहा है। बात-बात पर गुस्सा भी आ रहा है।
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मनोचिकित्सक की ओपीडी में इन्हीं लक्षणों के साथ अभिभावक अपने बच्चों को उपचार के लिए लेकर आ रहे हैं। काउंसिलिंग में सामने आ रहा है कि बच्चे तीन से चार घंटे तक मोबाइल चला रहे हैं और फीजिकल गेम न के बराबर खेली जा रही है। बता दें कि कोरोना महामारी के बाद मनोचिकित्सक की ओपीडी में बच्चों से संबंधित केस भी बढ़े हैं। पढ़ाई को लेकर दबाव भी बच्चों को डिप्रेशन का शिकार बना रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि मानसिक रूप से बीमार होने का सबसे बड़ा कारण ये भी है कि मां-बाप बच्चों को समय नहीं दे रहे है।
केस 1
फोन के बिना बेटा नहीं खाता खाना
मनोचिकित्सक की ओपीडी में बच्चे को लेकर आए अभिभावक ने बताया कि उनका बेटा बात-बात पर गुस्सा करता है और चिढ़ चिड़ापन आ गया है। बेटा बिना फोन के खाना नहीं खाता है और दो घंटे लगातार मोबाइल चलाता है। फोन न देने पर खाना छोड़ देता है।
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केस 2
बेटी गुमसुम रहती है, मोबाइल ही चलाती है
ओपीडी में आए अभिभावक ने बताया कि उनकी छह साल की बेटी गुमसुम रहती है और बुलाने पर भी बात नहीं करती है। काउंसिलिंग में सामने आया कि मां-बाप नौकरीपेशा वाले है और समय नहीं दे पा रहे है। बेटी अकेले में ही मोबाइल चलाती रहती है और गेम खेलती रहती है।
अभिभावकों के लिए ये जरूरी
माता पिता बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं।
बच्चे कोई सामान लेने की जिद करें तो उसके अच्छे और बुरे फायदे जरूर बताएं।
अभिभावक जितना हो सके बच्चों से खाली समय में जरूर काम लें।
बच्चों की आउटडोर गेम में रुचि बढ़ाएं।
कम उम्र के बच्चों को मोबाइल का प्रयोग न करने दें।
बच्चों को पूरे दिन में एक से डेढ़ से ज्यादा मोबाइल स्क्रीन का इस्तेमाल न करें दें।
कोट
मोबाइल फोन का ज्यादा प्रयोग बच्चों की ग्रोथ पर असर डाल रहा है। बच्चों में चिढ़ चिड़ापन आ रहा है। मां-बाप का व्यस्त रहना और बच्चों को समय न देना भी बच्चे का विकास न कर पाने में एक कारण है। मां-बाप बच्चों को समय दें और मोबाइल का जितना हो सके कम से कम दें।
-गविंद्र कौर, क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक, नागरिक अस्पताल
30 फीसदी बच्चे एनीमिया का हो रहे शिकार
बच्चों की डाइट सही न होने के कारण एनीमिया का शिकार हो रहे है। बच्चों को दूध के अलावा न डाइट की भी जरूरत होती है लेकिन फीडिंग करवाते रहते है जिससे खून की कमी रहती है। इसलिए बच्चों की डाइट पर ध्यान देना जरूरी है।
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-डॉ. वरुण मुंजाल, शिशु रोग विशेषज्ञ।
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