शहर के सन्यास आश्रम मंदिर में श्री मद्भागवत कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु।
फतेहाबाद। शहर के संन्यास आश्रम मंदिर में चल रही साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा का वीरवार को समापन हुआ। इसके बाद हवन यज्ञ और भंडारा हुआ। भागवत कथा का आयोजन श्री संन्यास आश्रम मंदिर समिति की ओर से करवाया गया। इस दौरान कथावाचक संत विभानंद सरस्वती ने कहा कि आत्मा को जन्म व मृत्यु के बंधन से मुक्त कराने के लिए भक्ति मार्ग से जुड़कर सत्कर्म करना होगा।
उन्होंने कहा कि हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ मनुष्य को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों के बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है। श्रीमद्भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य शरीर भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान को लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। इस मौके पर परमानंद मदान, राकेश नागपाल, नंद लाल वधवा, पीयूष नारंग, दिपांशु जग्गा सहित मंदिर कमेटी के सदस्य आदि मौजूद रहे।