फतेहाबाद। जिला पुस्तकालय का स्थायी भवन नहीं होने के चलते किताबें बोरियों में बंद हो चुकी हैं। पिछले तीन महीनों से जिला पुस्तकालय को फतेहाबाद के बाल भवन में संचालित किया जा रहा है। यहां पर पर्याप्त जगह नहीं होने से किताबें रखने की जगह नहीं मिल रही है। विद्यार्थियों ने पुस्तकालय भवन की मांग है।
जिला पुस्तकालय के लिए स्थायी जगह नहीं होने के कारण पिछले कई वर्षों से भवन के लिए संघर्ष जारी है। पहले जिला पुस्तकालय को बीडीपीओ कार्यालय के भवन में संचालित किया जा रहा था लेकिन वह भवन जर्जर घोषित होने के कारण प्रशासन की ओर से पुस्तकालय को नए बस अड्डे में शिफ्ट कर दिया गया। जहां पर जाने से विद्यार्थियों ने मना कर दिया इसके बाद पुस्तकालय को फतेहाबाद के बाल भवन में शिफ्ट किया गया। बाल भवन के कमरे का आकार छोटा होने के कारण इसमें विद्यार्थियों को बैठने की व पुस्तकें रखने की उचित जगह नहीं है। ऐसे में युवाओं को पुस्तकों का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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20 भाषाओं की तीन हजार से अधिक पुस्तकें हैं पुस्तकालय में
फतेहाबाद के बाल भवन में अस्थायी तौर पर बनाई गए जिला पुस्तकालय में पर्याप्त जगह नहीं होने से किताबों को बोरियों में बंद करके नए बस अड्डे में रखा गया है। इससे इन पुस्तकों की संभाल नहीं हो पा रही है। पुस्तकालय में निरंतर अध्ययनकरने पहुंचने वाले छात्र राहुल, संजय, दीपक, पिंटू और निशा आदि ने बताया कि पुस्तकों के बिना पढ़ाई करना मुश्किल हो रहा। बंद बोरियों में रखी किताबें खराब होने लगी है। जिला पुस्तकालय में 20 भाषाओं की तीन हजार से अधिक पुस्तकें हैं।
यह बोले छात्र
पुस्तकालय में जगह नहीं होने से किताबें खरीदकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। वहीं कई विषयों की पुस्तकें बाजार में मिलती भी नहीं है। इससे युवाओं को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
अजय
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पिछले कई वर्षों से पुस्तकालय की मांग अधूरी है। ऐसे में ना तो किताबों को जगह मिली है और ना ही विद्यार्थियों को। प्रशासन को इसकी युध लेनी चाहिए।
संजय
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नए बस अड्डे में पुस्तकों को रखा गया। इससे किताबों की देखभाल नहीं हो पा रही है। इससे पुस्तकों के खराब होने की संभावना बनी हुई है।
अनिल
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बारिश के दौरान बाल भवन में पानी भर जाता है। अध्ययन के लिए 100 से अधिक सीटों की आवश्यकता है लेकिन 25 से 30 सीटें लगी हुई हैं।
रिंकू