फोरलेन हाईवे के निर्माण के लिए अधिग्रहीत की गई बकाया जमीन का कम मुआवजा घोषित करने पर धरना देकर बैठे किसानों को मनाने मंगलवार दोपहर को एसडीएम संतलाल पचार, नेशनल हाईवे के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वीके जैन तथा जिला राजस्व अधिकारी विजेंद्र भारद्वाज पहुंचे।
अधिकारियों ने पहले किसानों की मांग को सुना और फिर कहा कि धरना उठा दो और कोर्ट में केस कर दो, वहां से मुआवजा मिल जाएगा। लेकिन किसानों ने दो टूक जवाब दिया कि पहले बाजार भाव के हिसाब से मुआवजा दो फिर धरना खत्म करेंगे।
फोरलेन हाईवे के लिए बकाया जमीन का पिछले सप्ताह मुआवजा घोषित किया गया जो पहले दिए मुआवजे से 11 लाख रुपये प्रति एकड़ कम था। इस दौरान बस्ती भीमा, खान मोहम्मद के आसपास के लगभग 80 किसानों ने विरोध किया और अगले दिन बाईपास पर धरने पर बैठ गए।
मंगलवार को धरने के छठे दिन तीनों अधिकारी किसानों को मनाने के लिए पहुंचे कि आर्मीटेक में केस कर ही रखा है तो किसानों को उचित मुआवजा मिल जाएगा। इस पर किसान महेश मैहता, निर्मल सिंह, मांगेराम आदि ने कहा कि उनकी जमीन शहर के अंदर है और उसके नजदीक ही लघु सचिवालय, सेक्टर है।
उस हिसाब से उनकी जमीन का रेट कम लगाया गया है, जबकि धांगड़ और दरियापुर के किसानों को दो करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया गया है। अब जो मुआवजा घोषित किया गया है वह पहले 51 लाख था और अब 40 लाख रुपये सुनाया जा रहा है।
एसडीएम पचार ने कहा कि मुआवजा राशि कलेक्टर रेट के हिसाब से घोषित की गई है। इसलिए इसमें बढ़ोतरी कोर्ट के जरिए हो सकती है। आप कोर्ट में अपने प्रूफ दे दो। अगर कोर्ट को लगेगा तो वह बढ़ा देगी। इस पर किसानों ने कहा कि कोर्ट में उन्हें तारीख पर तारीख मिल रही है। उन्हें जब तक बाजार भाव में मुआवजा नहीं मिलेगा वह धरने से नहीं उठेंगे और न ही जमीन पर कब्जा देंगे।