भूना। नगर पालिका को भंग कर पंचायत व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर जन अधिकार कमेटी की बैठक हुई। इसमें शहर के विकास, रोजगार, करों के बोझ और प्रस्तावित कचरा निस्तारण संयंत्र को लेकर चर्चा की गई। बैठक में आगामी रणनीति तैयार करते हुए पंचायत व्यवस्था के पक्ष में विभिन्न सुझाव रखे गए।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि नगर पालिका क्षेत्र में विकास शुल्क, बिजली-पानी कर और संपत्ति पहचान पत्र से जुड़े करों के अलावा अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने की प्रक्रिया में भी लोगों को परेशानी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार लोगों को काम करवाने के लिए महीनों कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
कमेटी सदस्यों ने पंचायत व्यवस्था के पक्ष में जनसमर्थन जुटाने और मांग को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर प्रयास करने पर जोर दिया। सेवानिवृत्त कार्यकारी अभियंता पीडी शर्मा, पूर्व चेयरमैन चंद्रभान मेहता, सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक वीरेंद्र शर्मा, अंकित कंबोज, एडवोकेट नरेंद्र रेवड़ी, नत्थू राम दहिया, पूर्ण चंद कंबोज, अंकित शीला, पाला राम कंबोज और डॉ. जितेंद्र तूर सहित अन्य लोगों ने पंचायत बनाने के पक्ष में अपने विचार रखे।
24 एकड़ में कचरा निस्तारण संयंत्र लगाने की योजना पर जताई चिंता
पूर्व जिला पार्षद बलविंदर सिंह कैरों ने कहा कि नगर पालिका के अधिकारियों की ओर से जिले के कचरे के निस्तारण के लिए करीब 24 एकड़ में संयंत्र लगाने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है तथा भूना सहित आसपास के गांवों के लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भूना के लोग शहर में बड़े उद्योग और रोजगार के अवसर चाहते हैं लेकिन ऐसा संयंत्र नहीं, जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़े। उनके अनुसार, भूना के साथ जांडली खुर्द, जांडली कलां और नाढोड़ी गांव भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।
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पंचायत बनने से रोजगार और जनप्रतिनिधित्व बढ़ने का दावा
एडवोकेट प्रवीण राणा ने कहा कि नगर पालिका की जगह पंचायत व्यवस्था लागू होने से मनरेगा के माध्यम से करीब छह हजार लोगों को सीधे रोजगार मिलने की संभावना है। उन्होंने दावा किया कि शहर में दो या तीन पंचायतें बनने पर सरपंचों सहित 45 से अधिक महिला और पुरुष प्रतिनिधियों को अपने-अपने क्षेत्रों के विकास में भागीदारी का अवसर मिल सकता है। इसके विपरीत, नगर पालिका में चेयरमैन सहित करीब 16 जनप्रतिनिधियों को ही प्रतिनिधित्व का अवसर मिलता है।