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Fatehabad News: बढ़ती ठंड का असर पशुओं पर, कम पानी पीने के कारण पथरी के बढ़ रहे रोग

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गांव बड़ोपल में ठंड से बचाने के लिए कटड़े को बांधी गई बोरी। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। जिले में पड़ रही तेज ठंड का असर जनमानस पर ही नहीं बल्कि पशुओं पर भी जारी है। सर्दी में कम पानी पीने व ठंड लगने के कारण पशु खासतौर पर छोटे कटड़े व गायों के बछड़े बीमार हो रहे हैं। इनको पेशाब की कमी, पथरी व निमोनिया की शिकायत आ रही है। पशु चिकित्सकों के पास प्रतिदिन चार से पांच पशु इन बीमारियों से गस्त होकर आ रहे हैं और उनका इलाज भी किया जा रहा है।
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पशु चिकित्सकों के अनुसार, सर्दी के दिनों में बछड़े व कटड़े पूरा पानी नहीं पीते हैं। जिससे उनमें पानी की कमी हो जाती है औैर पेशाब नली में पथरी हो जाती है। पेशाब के लिए पशु जोर लगाते हैं, जिससे उसको काफी दिक्कत आती है और वह रंभाता रहता है। पशु चिकित्सकों के अनुसार, बछड़े व कटड़े की पेशाब नली की बनावट अंग्रेजी के एस की तरह होती है। सर्दी में बछड़ा या कटड़ा कम पानी पीता है तो पेशाब नली में जो मोड़ होता है, वहां हल्के कण जमा होने लगते हैं, जो बाद में पथरी का रूप ले लेते हैं। जिससे उनकी पेशाब नली ब्लॉक हो जाती है और मूत्र मार्ग पर सूजन आ जाती है। जोर लगाने पर पशु को काफी दिक्कत आती है और पेट भी अधिक फूला हुआ नजर आता है। इससे त्वचा भी गलने लगती है और समय पर उपचार न मिले तो उसकी जान को खतरा भी बन जाता है। इसके अलावा अगर पशुओं को ठंडे स्थान पर रखा जाता है तो उनको निमोनिया की शिकायत भी हो जाती है।
पशुओं को ठंड से बचाने के उपाय
पशुओं को जहां पर रखा जाए उस स्थान पर तुड़ी या पराली डालकर स्थान को बिल्कुल सुखा रखें, पशुओं के बाड़े के दरवाजे पर पर्दा लगा दें ताकि बाड़ा गर्म रहे, पशुओं के बाड़े में आग या हीटर जलाएं, जिससे मकान का तापमान बढ़ सके, पशुओं को हल्का गर्म पानी पिलाएं, पशुओं के शरीर के ऊपर गर्म कपड़ा डालें रखें जब तक कि धूप न निकले, धूप निकलने से पहले से पशुओं को बाहर खुले में न रखें, पशुओं को चारा बाड़े के अंदर ही दें, पशुओं को कम से कम बाहर निकालें, पशुओं को गर्म आहार दें, पशुओं को चारा समय पर डाले।
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कोट
पशु ठंड के कारण पानी और चारा कम खाते हैं, जिसकी वजह से दूध उत्पादन कम होना और निमोनिया जैसी बीमारी होना आम बात है। धूप नहीं निकलने से पशुओं की मांसपेशियों में जकड़न आ जाती है, जिसके कारण पशु को भूख प्यास कम लगती है।
-डॉ. संजय वत्स सर्जन, भट्टूकलां।
कोट
ठंड के मौसम में धूप न निकलने व अधिक ठंड का प्रभाव बड़े पशुओं के साथ-साथ बछड़ों व कटड़ों पर अधिक होता है। पशु चिकित्सालयों में प्रतिदिन चार से पांच पथरी व निमोनिया ग्रस्त बछड़े व कटड़ेे आ रहे हैं, जिनका इलाज लगातार किया जा रहा है।
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-डॉ. सुखविंद्र, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग, फतेहाबाद।
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