धरने के बाद इनेलो कार्यकर्ताओं ने सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी, प्रदेश
प्रवक्ता निशान सिंह, जिलाध्यक्ष बलविन्द्र कैरों, विधायक बलवान
दौलतपुरिया, प्रो. रविन्द्र बलियाला व पूर्व विधायक रणसिंह बैनीवाल के
संयुक्त नेतृत्व में एसडीएम संतलाल पचार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन
सौंपा।
धरना स्थल पर पहुंचे जिले भर के इनेलो कार्यकर्ताओं के बीच
सभी नेताओं ने सरकार द्वारा अंदरखाते बढ़ाए गए बिजली के दामों की कड़े
शब्दों में निंदा की।
सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी ने स्पष्ट किया कि
यदि सरकार ने इस जनविरोधी निर्णय को जल्द वापस नहीं लिया तो इनेलो विधानसभा
में सरकार को इस मुद्दे पर तो घेरेगी ही, प्रदेश स्तर पर जनहित में बड़ा
आंदोलन छेड़ने से भी पीछे नहीं हटेगी।
रोड़ी ने कहा कि पिछले एक
वर्ष से बिजली की दरों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। बिजली वितरण कंपनियों ने
घरेलू स्तर पर बिजली की स्लैब दरों में चुपचाप 800 यूनिट की खपत सीमा को
घटा कर 500 यूनिट कर दिया है।
बिजली की 500 यूनिट पर 6 रुपये 75
पैसे प्रति यूनिट बिजली की दर व 1 रुपये 69 पैसे फ्यूल सरचार्ज निर्धारित
किया है, जिसने जनता की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से तहस-नहस करके रख दिया
है।
सांसद रोड़ी ने कहा कि अच्छे दिनों का हवाला देकर सत्ता में
आई भाजपा सरकार ने पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए ये जनविरोधी निर्णय
लिए हैं। आम जनता के लिए तो बुरे दिनों की शुरुआत है।
इनेलो जनहित
में उनके खिलाफ हर प्रकार का संघर्ष करने को तैयार है। प्रदेश प्रवक्ता
निशान सिंह ने कहा कि बिजली के दाम बढ़ाने के मामले में उपभोक्ताओं को
बिजली शुल्क व नगर पालिका शुल्क के रूप में 15 पैसे प्रति यूनिट अदा करना
पड़ता है, जिसे कुल मिलाकर उपभोक्ता को प्रति यूनिट 8 रुपये 65 पैसे बिजली
मिलती है।
जबकि इससे पहले उपभोक्ताओं को इतनी बिजली प्राप्त करने
के लिए साढे़ 5 रुपये प्रति यूनिट अदा करने होते थे। बिजली कंपनियों ने
बिजली के प्रबंधन में सुधार करने की बजाय आम जनता पर फ्यूल सरचार्ज का बोझ
डालकर बेतहाशा बिजली के बिलों में वृद्धि कर दी है।
साल में दो बार फ्यूल सरचार्ज बढ़ने से जनता की टूटी कमर
उन्होंने
बताया कि सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में दो बार बिजली तथा फ्यूल
सरचार्ज में बढ़ोतरी हुई है। रतिया के विधायक रविंद्र सिंह बलियाला ने कहा
कि हरियाणा बिजली नियामक आयोग द्वारा 2015-16 के लिए बिजली वितरण कंपनियों
ने जो दरें निर्धारित की हैं उन दरों पर बिजली भरने पर आम आदमी की कमर टूट
जाएगी।
प्रदेश से औद्योगिक इकाइयां व व्यवसायिक संस्थाएं अपना
कारोबार बंद कर दूसरे प्रदेशों में जा रही हैं क्योंकि उक्त इकाईयों को 9
रुपये प्रति यूनिट से भी अधिक दरों पर बिजली बिल अदा करने पड़ते हैं जोकि
पूरे देश में अधिक हैं।