फतेहाबाद। फतेहाबाद में नेशनल हाईवे पर बने अवैध कट बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। हाईवे के बीचोबीच बने डिवाइडरों पर कट बनाकर लोगों ने आने जाने का रास्ता बना लिया है। इससे हादसों का आशंका बढ़ गई है। वहीं हाईवे भी कई स्थानों पर टूटी हैं। जहां सड़कें टूटी हैं, वहां पर मिट्टी से भरे कट्टे रखे गए हैं, लेकिन रात के समय दिखाई न देने से यहां पर दुर्घटना होने का भी डर रहता है। हैरानीजनक स्थिति यह है कि जिम्मेदार अधिकारी न तो स्वयं संज्ञान ले रहे हैं, और न ही शिकायतों की कोई सुनवाई कर रहे हैं।
दरअसल, फतेहाबाद में नेशनल हाईवे-9 पर फोरलेन बाईपास को बने आठ साल से अधिक का समय हो गया है। इस बाईपास के बनने के बाद भले ही शहर में ट्रैफिक कम हुआ है, लेकिन अब सड़कें दरकने लगी हैं। हाल ही में आई बाढ़ के बाद तो हाईवे पर माजरा रोड से लेकर दरियापुर तक बाढ़ का पानी पांच से छह फुट तक आ गया था। फोरलेन की सर्विस रोड तो पूरी तरह से पानी में डूब गई थी। बाढ़ के पानी के कारण इस सड़क को काफी नुकसान हुआ था। अब हालात यह हैं कि यहां पर कई स्थानों पर सड़क में कटाव आ गया है और यहां पर मिट्टी व मिट्टी से भरे कट्टों को रखा गया है।
रात के समय अधिक खतरा
रात के समय अगर कोई बाहर से वाहन लेकर चालक आता है तो मिट्टी से भरे कट्टों को देखने में दिक्कत आएगी। इससे हादसों का खतरा बना रहेगा। छोटे-मोटे हादसे तो अक्सर इस रोड पर होते रहते हैं। वहीं, दूसरी ओर सर्विस रोड पर भी प्रशासन ने शहर में बाढ़ के पानी को रोकने के लिए मिट्टी लगवाई थी, जिसे अभी तक खाली नहीं किया गया है। नेशनल हाईवे पर वाहनों की रफ्तार काफी तेज होती है और इससे बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। यही नहीं हाईवे पर लोगों ने बीचोबीच बने डिवाइडर को एक सड़क से दूसरी सड़क पर जाने के लिए कट लगा रखे हैं। धांगड़ रोड व माजरा रोड पर डिवाइडर पर लोगों ने कट बनाकर आने जाने का रास्ता बनाया हुआ है, लेकिन इस पर संज्ञान लेने को लेकर प्रशासन का ध्यान नहीं है।
सिर्फ बैठकों में अधिकारियों की दिखती है सक्रियता
नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अधिकारियों की सक्रियता सिर्फ बैठकों में नजर आती है। इसके अलावा धरातल पर अधिकारी छोटी-छोटी समस्याओं की तो गिनती ही नहीं करते हैं। कटों के अलावा नेशनल हाईवे पर लगे साइन बोर्ड भी लावारिस हालत में ही लगे हुए हैं। कई साइन बोर्ड के आगे तो लंबी-लंबी घास उगी हुई हैं, जिनके कारण दूर से साइन बोर्ड नजर ही नहीं आते हैं। कई बार लोगों ने अधिकारियों के संज्ञान में भी डाली, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ है।
कोट
बाढ़ के कारण नेशनल हाईवे की सड़क को इतना नुकसान नहीं हुआ है। दो बार इसका भौतिक परीक्षण किया गया है। कुछेक स्थानों पर सड़कें टूटी है, जिसकी मरम्मत करवाई जाएगी। जहां से डिवाइडर तोड़े गए हैं, उनको भी दुरूस्त किया जाएगा।
-सुभाष भांभू, अभियंता, एनएचएआई