फतेहाबाद। मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना के तहत सेक्टर 9 में प्लॉट लेने के लिए कोठी व मकानों के मालिकों ने भी खुद को गरीब बताकर आवेदन कर दिया। यहां तक 10 हजार रुपये जमा करवाकर प्लॉट की बुकिंग भी करवाई है। जब इन आवेदनों की वेरिफिकेशन हुई तो उसमें इसका खुलासा हुआ है। 10 आवेदनों को विभाग ने रद्द कर दिया किया है।
सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री आवास योजना को लेकर दूसरे चरण में पहले आवेदन कर चुके 883 परिवारों से प्लॉट की बुकिंग के लिए आवेदन मांगे थे। इसको लेकर 249 लोगों ने पोर्टल पर 10 हजार जमा करवाकर बुकिंग करवाई। नगर निकाय की तरफ से 169 आवेदनों की जांच की गई है। इसमें 10 आवेदन ऐसे मिले हैं जिनकी कोठी या मकान है। जबकि योजना किरायेदारों के लिए थी। हालांकि 80 आवेदनों की अभी जांच होनी बाकी है।
वेरिफिकेशन के बाद विभाग प्लॉट अलॉटमेंट के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजेगा। अलॉटी को एक लाख रुपये में 30 गज का प्लॉट मिलना है। इसमें भी 10 हजार रुपये एक बार और 80 हजार रुपये 2200 रुपये किस्त के हिसाब से देने हैं। सरकार की तरफ से ढाई लाख रुपये मकान बनाने के लिए मिलेंगे। हालांकि पूरी प्रक्रिया के बाद भी 804 प्लॉट खाली रह जाएंगे। एचएसवीपी की तरफ से यहां बनने वाली कॉलोनी में सड़क, सीवरेज, बिजली-पानी की व्यवस्था करवाई जानी है।संवाद
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1236 प्लॉट हैं आरक्षित, बुकिंग सिर्फ 442 की
शहर फतेहाबाद के लाभार्थियों के लिए 1236 भूखंड आरक्षित हैं, लेकिन वर्ष 2024 में पहले चरण में सिर्फ 887 लोगों ने ही आवेदन किया। जबकि 10 हजार रुपये देकर 197 लोगों ने ही बुकिंग करवाई थी और 193 को प्लॉट अलॉट हुए। इस साल विभाग ने 887 से 10 हजार रुपये देकर बुकिंग मांगी लेकिन आवेदन 249 ने किया।
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नया मकान बनाने के लिए मिलेंगे ढाई लाख
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना 2.0 के तहत कच्चे मकान मालिकों को भी ढाई लाख रुपये मिलने हैं लेकिन सत्यापन में गड़बड़ी मिल रही है। टीमों को कई जगह पर ऐसे मकान मिले हैं जो कि पक्के हैं और मरम्मत की जरूरत नहीं है। फतेहाबाद में अब 838 आवेदन आए है जबकि सत्यापन 738 की हुई है। भूना में सबसे ज्यादा 3325 आवेदन है और 1525 की जांच हुई है। जाखल में 141 आवेदन आए है और सभी की जांच हो चुकी है। रतिया में 479 आवेदनों में से 288 की जांच हुई है और टोहाना में सबसे कम वेरिफिकेशन हुई है। यहां पर 1152 आवेदनों में से सिर्फ 250 की जांच हुई है।
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मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना के तहत जिन पात्रों ने आवेदन किए है। उनके दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया की जा रही है। जिन्होंने आवेदन किया है वह किरायेदार होना चाहिए और कोई मकान उनके नाम नहीं होना चाहिए। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रोजेक्ट बनाकर मुख्यालय को भेजा जाएगा।
-प्रवीन कुमार, इंचार्ज, शहरी आवास योजना