भूना। ढाणी भोजराज गांव में अंतरजातीय विवाह विवाद से जुड़े एससी/एसटी एक्ट का भय दिखाकर कथित अवैध वसूली प्रकरण में आरोपी सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर दर्शन सिंह को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत नहीं मिल सकी। वीरवार को हुई न्यायाधीश सुमित गोयल की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
दर्शन सिंह हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हैं और पूर्व में तत्कालीन डीएसपी के रीडर के रूप में कार्यरत रहे हैं। इस मामले में दर्शन सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के हिसार थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले की जांच एसीबी के डीएसपी अमित बेनीवाल कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष की ओर से एडवोकेट हितेश वर्मा ने अग्रिम जमानत के पक्ष में दलीलें दीं। वहीं सरकार की ओर से सीनियर डीएजी महिमा यशपाल सिंगला ने जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पक्ष रखा। शिकायतकर्ता की ओर से एडवोकेट अमित चौधरी ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए मामले से जुड़े तथ्य अदालत के समक्ष रखे।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दर्शन सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अब मामले में आगे की कार्रवाई जांच एजेंसी द्वारा की जाएगी। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
ये है मामला
ढाणी भोजराज में अंतरजातीय विवाह के बाद दर्ज एससी/एसटी एक्ट मामले का भय दिखाकर ग्रामीणों से कथित तौर पर करीब 10 लाख रुपये की राशि जुटाई गई। भूना निवासी नरेश सोनी ने 13 मई 2025 को एसीबी को शिकायत देकर मामले की जांच की मांग की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जुटाई गई राशि में से करीब साढ़े पांच लाख रुपये डीएसपी तक पहुंचाने की बात एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग में सामने आई थी। जांच के दौरान सामने आई वॉयस रिकॉर्डिंग को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया था। फॉरेंसिक मिलान के बाद प्राप्त रिपोर्ट को जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। इसके बाद दर्शन सिंह ने एक अप्रैल 2026 को गिरफ्तारी से राहत के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।