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Fatehabad News: हेपेटाइटिस किट की मियाद खत्म, बंद हुई जांच

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फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में सैंपल रिपोर्ट लेते हुए मरीज।
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फतेहाबाद। स्वास्थ्य विभाग ने किट की मियाद खत्म होने के चलते हेपेटाइटिस की जांच रोक दी है। अब नई किट आने के बाद ही मरीजों की जांच हो पाएगी। विभाग के पास जो किट थी उसकी मियाद 31 मई तक थी जो कि खत्म हो गई है। विभाग ने अब नई किट की डिमांड की है। जिले में फिलहाल हेपेटाइटिस सी के 150 और बी के करीब 55 मरीजों का उपचार चल रहा है।
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इन बीमारियों की दवाइयों को लेकर पहले ही संकट था। जिला मुख्यालय के नागरिक अस्पताल में हेपेटाइटिस बी के मरीजों के लिए दवाई का स्टॉक करीब एक माह पहले खत्म हो गया था जो कि अब तक नहीं आई है। हेपेटाइटिस मरीज को एक दवाई दी जाती है जिसका स्टॉक ही नहीं है। यहां पर करीब 50 से 55 मरीजों का उपचार चल रहा है। इसके अलावा हेपेटाइटिस सी के मरीजों का उपचार भी दवा न मिलने के कारण बीच में अटक गया है। दो में से एक ही दवाई स्टॉक में है। काला पीलिया यानि हेपेटाइटिस सी के मरीजों को सोफा वेल्पा और सोफा डेक्ला दवाई दी जाती है। लेकिन सोफा वेल्पा का स्टॉक नहीं है। संवाद
पहले निजी लैब में होती थी जांच
जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस सी का उपचार शुरू होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के लिए निजी लैब से अनुबंध किया था। मरीज को डॉक्टर कार्ड जारी करते और उसे दिखाकर निजी लैब से जांच करवाई जाती थी और उसके बाद जिला अस्पताल में ही मरीज को दवाई उपलब्ध करवाई जाने लगी। लेकिन पिछले साल 28 जुलाई को स्वास्थ्य विभाग ने निजी लैब से अनुबंध खत्म कर दिया और आरटीपीसीआर लैब में जांच शुरू करने के निर्देश दिए।
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हेपेटाइटिस सी को लेकर रेड जोन में रहा है जिला
हेपेटाइटिस सी वायरस के लक्षण पांच से लेकर सात सालों के बाद नजर आते हैं। रतिया क्षेत्र में सर्वे के दौरान सामने आया था कि आरएमपी डाक्टरों ने इलाके में कई लोगों को एक ही सीरिंज से टीके लगाए जिससे हेपेटाइटिस सी वायरस (एससीवी) एक से दूसरे में चला गया। रतिया व उसके आसपास के क्षेत्र में करीब 11 साल पहले काला-पीलिया के आशंकित मरीज सामने आने लगे थे। रतिया में सर्वे के दौरान करीब 15 सौ मरीज सामने आए और बढ़ते चले गए। रतिया, हमजापुर, बुर्ज, बीराबदी, टोहाना, कुलां, अकांवाली, झलनियां, एमपी सोतर, टिब्बी, अयाल्की, नहेड़ी, समैन, चिम्मो, इंदाछुई, बिलासपुर, हिजरावां खुर्द, अहरवां, घासवां, नागपुर, बहबलपुर, नथवान, रत्ताखेड़ा, भिरड़ाना, धीड़, हसंगा, जमालपुर, जल्लोपुर, कमाना समेत जिले के कई गांवों में हेपेटाइटिस सी के मरीज पाए गए।
हेपेटाइटिस सी के मरीज को तीन से छह माह तो बी की खानी होती है एक साल दवा
डॉक्टरों के मुताबिक हेपेटाइटिस सी के मरीजों को तीन माह दवा खानी होती है। जिन मरीजों का लीवर खराब हो जाता है, उन मरीजों का 6 महीने दवाई दी जाती है। जिन मरीजों का उपचार पूरा हो गया है, उन्हें हेपेटाइटिस-सी का कार्ड टेस्ट दोबारा करवाने की जरूरत नहीं है, कार्ड टेस्ट 15 साल तक पॉजिटिव रह सकता है। इसके अलावा हेपेटाइटिस बी के मरीजों को करीब एक साल तक दवाई खानी होती है।
ये हेपेटाइटिस सी मरीजों की स्थिति
जिला अस्पताल में शुरू हुआ उपचार : वर्ष 2017
पंजीकृत मरीज : 6450
जांच के दौरान हेपेटाइटिस सी की मरीजों में हुई पुष्टि : 4950

कोट
हेपेटाइटिस बी की दवाई स्टॉक में खत्म है। हेपेटाइटिस सी की दवाई दो में से एक है। ये दवाई वेयर हाउस में भी नहीं है। दवाई खरीद को लेकर एनएसी मिल चुकी है। जल्द ही दवाइयां उपलब्ध हो जाएंगी।
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-डॉ. मनीष टुटेजा, उप सिविल सर्जन एवं विशेषज्ञ नागरिक अस्पताल
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