फतेहाबाद। शहर की सरकार का गठन हुए करीब ढाई साल का समय बीत चुका है, मगर अभी भी शहरवासी विकास को तरस रहे हैं। शहर के विकास पर प्रधान और उपप्रधान की राजनीति इस कदर हावी हो गई है कि जनता की सुविधाएं एकतरफ हो गई है। जनप्रतिनिधियों की लड़ाई के बीच अधिकारी अपनी मर्जी से नगर परिषद चला रहे हैं।
नगर परिषद के चेयरमैन राजेंद्र खिंची का करीब ढाई साल का कार्यकाल तो पूर्व विधायक दुड़ाराम से दूरियां बनाने में ही बीत गया है। आलम यह है कि नगर परिषद में नियमित रूप से हाउस की बैठक तक नहीं हो रही है। शहर में प्रवेश द्वार बनाने, पपीहा पार्क के मुख्य गेट का दोबारा निर्माण करवाने, शहर के विभिन्न चौकों को दूसरे शहर के तर्ज पर सुंदर बनाने जैसे प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चले गए हैं। न ही ग्रीन बेल्ट की हालत सुधरी है, वहीं बंदरों से लेकर लावारिस कुत्तों तक से जनता परेशान हो चुकी है। शहर बंदर मुक्त हो पाया न ही लावारिस पशु।
नहीं करवाया जा सका चौकों का निर्माण : नगर परिषद द्वारा शहर के विभिन्न चौकों का दोबारा से निर्माण करवाया जाना था, यह काम भी अटक चुका है। शहर के फव्वारा चौक को सुधारने के लिए अग्रवाल सभा ने गोद लिया था। इस चौक का नामकरण अब अग्रसेन चौक के तौर पर हो गया है। इसका 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। वहीं, दूसरी तरफ नगर परिषद प्रशासन अभी तक अपने स्तर पर एक भी चौक का सुंदरीकरण नहीं करवा सका है। नगर परिषद द्वारा शहर के हिसार व सिरसा रोड पर दो स्वागत द्वार लगाने के लिए एस्टीमेट बनाकर डिजाइन तक बना लिए गए थे, लेकिन अभी तक काम नहीं शुरू हुआ है। पिछले काफी समय से नगर परिषद की हाउस की बैठक भी नहीं हुई है।
नगर परिषद के पास करीब 70 करोड़ का बजट
फतेहाबाद नगर परिषद के पास शहर में विकास कार्य करवाने के लिए करीब 70 करोड़ रुपये का बजट पड़ा है। मगर उसके बाद भी विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। कई बार काम को प्रधान तो कई बार उपप्रधान रोक देती हैं। प्रधान व उपप्रधान की लड़ाई के चक्कर में पार्षद भी बंटे हुए हैं। शहर के बीचोंबीच बने डिवाइडर को सुधारने का काम भी कभी रुक जाता है, तो कभी शुरू कर दिया जाता है। विशेष बात यह है कि छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी शहरवासियों को अधिकारियों के बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं।
आवारा घूम रहे जानवरों का भी नहीं हुआ समाधान
नगर परिषद प्रशासन की ओर से शहर को लावारिस पशु मुक्त बनाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। बंदरों को पकड़ने के लिए एजेंसी को पिछले दिनों टेंडर दिया गया था। उस समय कुछ बंदरे पकड़े गए, लेकिन जनप्रतिनिधियों द्वारा नियमित रूप से कोई निगरानी नहीं रखी गई, तो यह काम भी अब ठप हो गया है। इसी तरह कुत्तों के बधीयाकरण को लेकर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस समस्या को लेकर भी पार्षदों सहित शहर के लोग धरने पर बैठ चुके हैं। मगर अब तक इन समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कार्रवाई सिरे नहीं चढ़ सकी है।
शहर के विकास के लिए नगर परिषद प्रशासन की ओर से लगातार काम किया जा रहा है। कई टेंडर लगाकर काम करवाए गए हैं। शेष बचे हुए कार्यों को भी जल्द ही पूरा करवाया जाएगा।
-राजेंद्र सिंह खिंची, चेयरमैन, नगर परिषद, फतेहाबाद।
शहर के विकास को लेकर हमारी तरफ से कोई कमी नहीं रखी जाती है। हमने तो बहुत से कार्य करवाए हैं। हाउस की बैठक बुलाने का अधिकार चेयरमैन के पास होता है। शहर की समस्याओं के समाधान के लिए लगे हुए हैं।
-सविता टुटेजा, वाइस चेयरपर्सन, नगर परिषद, फतेहाबाद