सिविल सर्जन कार्यालय से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं शिक्षा विभाग को भेजा गए पत्र की प्रति।
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नवजात की प्रतिरक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए चलाया जाने वाला टीकाकरण अभियान अब बच्चे के जन्म से दो साल तक ही सीमित नहीं रहेगा। अब नवजात बच्चे से लेकर 16 साल की उम्र तक टीकाकरण आवश्यक हो गया है। खुद सिविल सर्जन डॉ. अशोक चौधरी ने इसकी पुष्टि की है। इतना ही नहीं, उन्होंने जिले के सभी स्कूलों में बच्चों का टीकाकरण करने का आदेश जारी किया है।
जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों के इंचार्ज को भेजे लिखित आदेश में सिविल सर्जन डॉ. अशोक चौधरी ने कहा कि इस टीकाकरण अभियान को लेकर कुछ स्कूल संचालक गंभीर नहीं हैं, ऐसे में संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी ये सुनिश्चित करें कि जल्द से जल्द स्कूलों में सभी विद्यार्थियों को उचित प्रतिरक्षण के लिए टीकाकरण किया जाए। सीएमओ की ओर से शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी इस संदर्भ में एक पत्र भेजा गया है।
जानलेवा बीमारियां हैं टैटनस और परटूटस
टैटनस एवं परटूटस बिमारियों के बारे में ज्यादा जागरूकता नहीं होने के चलते कई बार अभिभावक या बच्चे इस बारे में सावधानी नहीं रखते और इन टीकाकरण को गंभीरता से नहीं लेते। ये बीमारियां वाकई जानलेवा हैं और इनका प्रतिरक्षण शून्य से 16 साल तक के बच्चे के लिए अति आवश्यक बताया गया है।
शून्य से 16 साल तक की उम्र के बच्चों में प्रतिरक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए टीकाकरण अनिवार्य किया गया है। स्कूलों के माध्यम से इसे लगाने में आसानी रहेगी। इसलिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों को ताकीद की गई है कि पहले स्कूलों के माध्यम से बच्चों का टीकाकरण करें।
- डॉ. अशोक चौधरी, सिविल सर्जन, फतेहाबाद