अनाजमंडी में रखी गेहूं की बोरियां।
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इस बार गेहूं खरीद मामले में फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) खरीद एजेंसी सबसे पीछे रही है। यदि अन्य एजेंसियों से तुलना करें तो इस एजेंसी की खरीद नाम मात्र ही रही है। मंडी में फिलहाल चार एजेंसियां गेहूं की खरीद कर रही हैं। इनमें फूड सप्लाई विभाग, हैफेड, हरियाणा वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन व फूड कॉरपोरेशन आफ इंडिया शामिल हैं। फिलहाल सबसे ज्यादा गेहूं की खरीद हैफेड ने की है। इसके बाद दूसरा स्थान फूड सप्लाई विभाग का रहा है। वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन व एफसीआई सबसे पीछे रहे हैं।
बता दें कि इस बार फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से व्यापारी शुरू से ही नाराज थे। दरअसल, अन्य एजेंसियों ने व्यापारियों का कमीशन पहले ही तय कर दिया था। मगर एफसीआई ने व्यापारियों को एडवांस में कमीशन बताने से इंकार कर दिया। खरीद एजेंसी ने कहा कि उन्हें उचित कमीशन दिया जाएगा। मगर व्यापारी इस बात से संतुष्ट नहीं हुए। व्यापारियों का कहना है कि हो सकता है, बाद में एजेंसी अन्य एजेंसियों से आधा कमीशन दे। इसलिए उन्होंने इस एजेंसी को गेहूं नहीं दिया।
एफसीआई से किसान नहीं थे खुश
एफसीआई ने किसानों से जमीन के कागजात जमा करवाने और रजिस्ट्रेशन करवा गेहूं की खरीद करने की बात कही थी। इसका विरोध किसान और आढ़ती दोनों ही कर रहे थे। किसानों निर्णय लिया कि वे अपनी फसल एफसीआई को नहीं बेचेंगे। किसानों का कहना है कि एफसीआई कानूनी उलझनों में ज्यादा डाल रही है। इसलिए किसानों ने एफसीआई को गेहूूं नहीं दिया।
फूड सप्लाई : 164681 एमटी
हैफेड : 221638 एमटी
एचडब्ल्यूसी : 79088 एमटी
एफसीआई : 49098 एमटी
रविवार ने हुआ नाममात्र उठान
इस बार रविवार को गेहूं के उठान का काम बंद रहा। हालांकि थोड़ा बहुत उठान हुआ है। बताया गया है कि ऑनलाइन गेट पास की सुविधा बंद रखी गई। इसके चलते उठान नहीं हो पाया। मंडियों में अब तक लगभग 22 लाख क्विंटल गेहूं का उठान हो पाया है।
कोट
इस बार चार एजेंसियां गेहूं की खरीद कर रही थी, जिसमें एफसीआई ने नाममात्र खरीद की है। दरअसल, एजेंसी व व्यापारियों के बीच गेहूं के कमीशन व दस्तावेजी औपचारिकताओं को लेकर विवाद था। इसलिए दोनों के बीच सहमति नहीं बन पाई थी।
- संजीव सचदेवा, सचिव मार्केट कमेटी।