फतेहाबाद। सिख धर्म की प्रथम पातशाही गुरु नानक देव महाराज की जयंती जिलेभर के गुरुद्वारों में श्रद्धा भाव से मनाई गई। शुक्रवार को शहर के विभिन्न गुरुद्वारों में प्रकाश उत्सव पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। शहर में मुख्य समारोह गुरुद्वारा जगजीवनपुरा में आयोजित किया गया। प्रात:काल शबद कीर्तन किया गया।
इस दौरान कथावाचक चरणजीत सिंह ने कहा कि सतगुरु नानक प्रगट्या, मिटी धुंध जग चानन होया, इसका सार यही है कि जब गुरु नानक देव आए तब कुदरत ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी। उनके आने से पहले ही देश को महका दिया और पूरी तलवंडी का माहौल बदल गया।
उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव महाराज ने जो ज्ञान रूपी ज्योति दिखाई, उसी का अनुसरण कर हमें अपने जीवन को धन्य बनाना चाहिए। शबद सिमरन से आत्मिक आनंद प्राप्त होता है, श्रद्धा से भरे सेवादार की अरदास जरूर सुनी जाती है। हमारे लिए इतिहास में इससे बढ़कर कोई दिन नहीं है कि गुरु नानक देवजी प्रकट हुए। उन्होंने कहा कि गुरु नानक उसे अपने गले लगाते हैं, जो ध्यान से सिमरन करता है। उन्होंने सारे संसार को सच का मार्ग दिखाने का काम किया। गुरुजी जहां भी गए, उन्होंने अपनी महक से सारे संसार के जीव-जंतुओं को महकाने का काम किया। गुरुजी उस चंदन की तरह थे, जिसकी महक से उसके आसपास का वातावरण भी महक जाता है।
उन्होंने बताया कि गुरुनानक देव कहते थे कि धरती धर्म पर टिकी हुई है। गुरुजी के आने से पूर्व धरती पर जब पाप का बोझ बढ़ गया तो कांपने लगी, तब अकाल पुरख ने पूछा तो धरती ने कहा कि पर्वतों, आसमान, इमारतों, समुद्र, नदियों, जीव-जंतुओं और न ही किसी अन्य चीज का भार है। धरती ने कहा कि पापियों का बोझ है। इस पर अकाल पुरख ने गुरुजी को धरती पर भेजा। उन्होंने कहा कि जहां भी गुरु नानक देव जी गए, वहां गुरुजी ने कोई न कोई करामात दिखाई। इस दौरान गुरु का अटूट लंगर चला। समागम में गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रधान हरचरण सिंह एडवोकेट, महासचिव महेंद्र सिंह वधवा, महेंद्र सिंह ग्रोवर, जेडी मोंगा, अवतार सिंह मोंगा सहित काफी संख्या में संगत उपस्थित रही।