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Fatehabad News: जीएसटी ने बढ़ाए उद्योगपतियों के खर्चे, कम होता जा रहा मुनाफा

Mon, 22 Jul 2024 05:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद। शहर में अलमारी बनाने के उद्योग की शुरुआत करीब 30 साल पहले हुई थी। सबसे पहले अलमारी बनाने के उद्योग की शुरूआत राजेश जिंदल ने किया था, अब शहर में लोहे की अलमारी बनाने के 15 उद्योग हैं। वहीं कोरोना काल से पहले शहर में अलमारी के 20 अधिक उद्योग थे। शहर के उद्योगपतियों को उद्योग चलाने के लिए कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अहम ये है कि यहां पर औद्योगिक क्षेत्र ही नहीं है जहां पर उद्योग लग सकें। इसी कारण से जिला मुख्यालय पिछड़ा हुआ है।
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जीएसटी में बढ़ोतरी के चलते उद्योगपतियों की बचत में कमी हो रही है। कोरोना काल से पहले अलमारियों के लिए प्रयोग होने वाले लॉक, पेंट और लोहे आदि के कच्चे माल पर जीएसटी 12 प्रतिशत थी, मगर कोरोना काल के बाद से जीएसटी को बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दी है। जिसके कारण छोटे उद्योगपतियों के खर्चे काफी बढ़ गए है और मुनाफा कम होता जा रहा है। ऐसे में अगर उद्योगपतियों को जीएसटी से राहत मिलती है तो उद्योगपति अपने उत्पाद का डंका पूरे देश में बजा सकेंगे। सरकार हर वर्ष जीएसटी बढ़ा रही है, मगर फिर भी उद्योगपतियों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है।

27 वर्ष बाद भी पूरी नहीं हुई औद्योगिक क्षेत्र की मांग

शहर में अलग से औद्योगिक क्षेत्र का नहीं होना उद्योगपतियों की सबसे बड़ी समस्यां है। शहर के अलमारी के उद्योगपति अशोक कुमार, सुमित कुमार, विरेंद्र कुमार और राजेश जिंदल आदि ने बताया कि पहले उनके उद्योग शहर के अशोक नगर और जवाहर चौक में थे। जहां पर लोगों के घर होने के कारण लोगो को परेशानी हो रही थी। जिसके कारण प्रशासन के आदेश अनुसार उद्योगपतियों को मजबूरन अपने उद्योग अशोक नगर और जवाहर चौक से हटाकर झलनिया रोड, खैराती खेड़ा रोड और सिरसा रोड पर स्थापित करने पड़े हैं। जिससे उनको लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। ऐसे में अगर सरकार शहर से बाहर औद्योगिक क्षेत्र के लिए जगह आरक्षित करता है तो उद्योगपतियों को बार-बार उद्योग नहीं बदलने पड़ेंगे और वह स्थायी तौर पर अपने उद्योग बना सकेंगे।
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मैंने लोहे की अलमारी उद्योग की शुरूआत सात वर्ष पहले शहर के अशोक नगर से की थी। मैं अलमारी के लिए प्रयोग होने वाला कच्चा माल हिसार मंगवाता हूं और अलमारियां तैयार करने के बाद हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में निर्यात करता हूं। मेरे उद्योग फिलहाल में 10 मजदूर काम करते हैं। अलमारियों का सीजन अक्टूबर से लेकर मार्च महीने तक रहता है। -सुमित कुमार, अलमारी उद्योगपति।



उद्योगपतियों को सरकार की ओर से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। जिले बनने के 27 वर्ष बाद भी शहर में औद्योगिक क्षेत्र नहीं है। जिसके कारण उद्योगपति अपने उद्योग निर्माण पर राशि खर्च करने का डरता है। ऐसे में शहर में औद्योगिक विकास होना असंभव हो गया है। मेरा अलमारी का उद्योग पहले अशोक नगर में था। जहां से प्रशासन उद्योग हटाने का आदेश दे दिया। जिससे मुझे लाखों का नुकसान हुआ है और सरकार की ओर से काई सहयोग नहीं मिला। - वीरेंद्र कुमार, अलमारी उद्योगपति।



फतेहाबाद शहर में अलमारी के उद्योग की शुरूआत 30 वर्ष पहले मेरे उद्योग से हुई थी। उस समय मेरा उद्योग शहर के जवाहर चौक पर लगाया था। उस समय मेरे उद्योग से अलमारियों पूरे देश में सप्लाई होती थी। उसके बाद प्रशासन ने मेरा उद्योग जवाहर चौक हटवा दिया। अब मेरा उद्योग फतेहाबाद शहर से 7 किलोमीटर गांव झलनियां के पास है। शहर के उद्योगपतियों को सरकार की ओर से काई सहायता नहीं मिल रही है। शहर के उद्योगपतियों के लिए सबसे बड़ी समस्यां औद्योगिक क्षेत्र का न होना है। -राजेश जिंदल, अलमारी उद्योगपति।
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