लघु सचिवालय के बाहर धरना देते हुए आशा वर्कर्स।
फतेहाबाद। विधानसभा घेराव करने जा रही आशा वर्कर की तबीयत बिगड़ने और बाद में मौत होने पर जिलेभर की आशा वर्कर्स ने शोक जताया। आशा वर्कर्स यूनियन ने प्रदेश सरकार से मृतक आशा वर्कर के आश्रितों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है। दूसरी ओर, सरकार द्वारा आशा वर्करों की मांगों को लेकर कोई सकारात्मक कदम न उठाए जाने से खफा होकर अपनी हड़ताल को 11 सितंबर तक आगे बढ़ा दिया है।
वीरवार को भी फतेहाबाद में आशा वर्कर्स ने लघु सचिवालय के बाहर 24वें दिन धरने को जारी रखते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने सरकार को चेताया कि अगर आशा वर्कर्स की मांगों का जल्द समाधान नहीं किया तो आंदोलन वर्कर्स अपने आंदोलन को और तेज करेंगी। धरने की अध्यक्षता आशा वर्कर्स यूनियन की जिला प्रधान शीला शक्करपुरा ने की जबकि संचालन वीना सहनाल ने किया। धरने को सविता भूना, रीतू ,कमल, मंजीत, उषा, सुरजीत, नीलम, पिंकी व रीतू सहित अनेक आशा वर्कर्स ने भी संबोधित किया।
जिला प्रधान शीला शक्करपुरा व सीटू जिला कैशियर बेगराज ने कहा कि 28 अगस्त को विधानसभा पर प्रदर्शन करने जा रही यमुनानगर जिले की आशा वर्कर्स को पुलिस द्वारा रोकने के प्रयास में धमकाया गया और पुलिस द्वारा आशाओं के बैग चेक करते हुए पानी की बोतल ले ली गई। इस चलते यमुनानगर की आशा वर्कर पारुल की रास्ते में ही तबीयत बिगड़ गई और कल देर शाम को उसकी मौत हो गई। यूनियन मांग करती है कि वर्कर के आश्रितों को 10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 से आशा वर्कर्स के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। आशा वर्कर्स के कार्य तीन गुना बढ़ा दिए गए हैं, महंगाई दोगुनी बढ़ गई है।