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घग्घर में फैल रहा प्रदूषण, मछलियों की 77 प्रजातियां हुई विलुप्त

Sun, 05 Jun 2016 12:21 AM IST
fatehabad
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घग्घर में फैल रहा प्रदूषण - फोटो : amar ujala
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सुरेन्द्र असीजा। पंजाब से होकर क्षेत्र से गुजर रही घग्गर नदी में पंजाब की फैक्ट्रियों से छोड़े जा रहे जहरीले पानी से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि क्षेत्र का वातावरण भी दिन प्रतिदिन दूषित होता जा रहा है। इसकी पुष्टि प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी भी करते हैं। फैक्ट्रियों से छोड़े जहरीले पानी से घग्गर में मिलने वाली मछलियों की अनेक प्रजातियां लुप्त हो गई हैं। पिछले पांच सालों से घग्गर की दशा काफी चिंताजनक है।
 
               हिमाचल प्रदेश शिवालिक की पहाड़ियों से पानी कालका में गिरता है। जहां से शुरू होती है घग्गर नदी। यह नदी कई राज्यों के प्रमुख शहरों से होकर गुजरती हुई क्षेत्र में पहुंचती है। इस नदी के तट पर कई उद्योग स्थापित हैं। इन उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ और गंदे पानी को घग्गर नदी में छोड़ दिया जाता है।
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पटियाला से शराब फैक्ट्री, टोहाना और सिरसा के एसटीपी का पानी घग्गर में गिरता है। पानी में कई प्रकार के केमिकल्स मिले होने के कारण यहां का वातावरण प्रभावित हो रहा है। पहले घग्गर में पानी से आसपास के किसान खेतों की सिंचाई करते थे किसानों का मानना है कि इस पानी से जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ती थी। घग्गर में साफ पानी के कारण सैकड़ों प्रजातियों की मछलियां मिल जाती थी। मत्स्य पालन विभाग के अनुसार पहले घग्गर नदी में विभिन्न प्रकार की 122 प्रजातियां पाई जाती थी। इनकी संख्या अब घटकर 45 के करीब रह गई हैं।

घग्गर नदी में मुख्यत: कटला, रोहू, पंपलेट, सुराही इत्यादि प्रजाति की मछलियां पाई जाती थी। दूषित जल के प्रभाव से मछलियों की संख्या में कमी आने लगी है। विभाग की मानें से समय रहते कोई कदम नहीं उठाए तो घग्गर नदी में मछलियां विलुप्त हो जाएंगी।

घग्गर का पानी खेतों में सिंचाई योग्य नहीं
फैक्ट्रियों के जहरीला पानी छोड़ने से किसान भी चिंतित है। घग्गर के तटवर्ती गांव लाम्बा के रामस्वरूप, महम्मदपुर के निहाल सिंह, चिम्मो के रामसिंह ने बताया कि इस समय घग्गर में जो पानी प्रवाहित हो रहा है वह बिल्कुल काला और जहरीला है। अगर इसे सिंचाई में प्रयोग करें, तो खेत में पौधा जल सकता है। कृषि उपनिदेशक बलवंत सिंह सहारण भी इस बात को स्वीकारते हैं कि बरसात के दिनों को छोड़कर घग्गर का पानी सिंचाई के योग्य नहीं रहा।

संयुक्त टीम के सैंपल हिसार लैब में टेस्ट में फेल
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हिसार के कार्यकारी अभियंता निर्मल कश्यप के अनुसार घग्गर के चांदपुरा साइफन पर आने वाला पानी पंजाब के संगरूर जिले से होकर आता है। यहां स्थापित उद्योग जहरीला पानी छोड़ते हैं, जो सीधा घग्गर में गिराया जा रहा है। इसके अलावा मूनक, चांदपुरा का घरेलू और पंजाब के समीपवर्ती क्षेत्रों में लगे उद्योगों का पानी घग्घर में छोड़ा जा रहा है। इस कारण घग्गर में जलीय जीव और मछलियां मर रही है। पानी खेतों में सिंचाई लायक भी नहीं रहा। उन्होंने बताया कि तीन माह पूर्व यहां से सैंपल लिए गए थे।

इसका हिसार लैब में टेस्ट हुआ, जो फेल पाए गए। इस मामले में शीघ्र ही सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड नई दिल्ली कार्रवाई करेगा। रिपोर्ट आने के बाद उपरोक्त यूनिटों को सील किया जाएगा। इसके अलावा कोई और यूनिट दूषित पानी छोड़ता है, उसके विरूद्व कार्रवाई की जाएगी। रही बात एसटीपी की तो संबधित विभाग को कहा गया है कि पानी को ट्रीट करके छोड़ा जाए नहीं तो प्रदूषण बोर्ड नोटिस जारी करेगा।
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 शिकायतकर्ता को सम्मानित किया जाएगा: कार्यकारी अभियंता
 कार्यकारी अभियंता निर्मल कश्यप ने बताया कि हरियाणा का कोई उद्योग ऐसा नहीं है, जो घग्घर में जहरीला पानी छोड़ता हो। पूर्व में कैथल में एक फैक्ट्री थी, जिसे सील किया गया था। उसके बाद फैक्ट्री ने घग्घर में डिस्चार्ज बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र में ऐसे उद्योग हो, तो कोई भी मुझे शिकायत कर सकता है। फैक्ट्री तो सील की ही जाएगी, शिकायतकर्ता को सम्मानित भी किया जाएगा। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि पर्यावरण बचाने के लिए हवा, पानी, जमीन की पवित्रता बनाए रखें। यह संसाधन सीमित हैं इसे नष्ट न होने दें।
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