सिविल सर्जन कार्यालय के एक कर्मचारी द्वारा फर्जीवाड़ा किए जाने का मामला सामने आया है। यह कर्मचारी सिविल सर्जन कार्यालय में नौकरी करता रहा और दूसरी तरफ जेबीटी कोर्स भी करता रहा। दोनों तरफ हाजिरी भी लगती रही। मामला सीएम विंडो में गया तो मामले की जांच भी हुई तथा कर्मचारी दोषी भी साबित हो गया। मगर बाद में अधिकारियों ने उसे यह लिखते हुए माफ कर दिया कि उसने जेबीटी कोर्स में कोई लाभ नहीं लिया। हालांकि जांच रिपोर्ट में चेतावनी की भी बात कही गई है।
जून 2020 में गांव बीसला के राजकुमार ने शिकायत दी कि फतेहाबाद निवासी नितिन बत्तरा एनएचएम स्कीम के तहत फतेहाबाद के सिविल सर्जन कार्यालय में नौकरी कर रहा है। अगस्त 2018 में उसकी नियुक्ति हुई। वहीं, रिकॉर्ड के साथ बताया गया कि नितिन बत्तरा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डिंग से रेगुलर जेबीटी भी करता रहा। सत्र 2018-19 में ही वह छात्र रहा था। दोनों जगहों पर उसकी हाजिरी भी लगती रही। राजकुमार ने इसकी शिकायत सिविल सर्जन व उपायुक्त को दी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद सीएम विंडो में शिकायत दी।
सीएम विंडो में शिकायत के बाद उपमंडल अधिकारी ने जांच की। जांच में शिकायतकर्ता के अलावा नितिन बत्तरा, सिविल सर्जन तथा डिंग डायट के प्राचार्य को जांच में शामिल किया गया। नितिन बत्तरा ने अपना पक्ष रखा कि उसने डिंग में एडमिशन लिया था, लेकिन बाद में नाम कट गया। उसने कोई डिग्री भी नहीं ली। न ही उसे कोई उस एडमिशन से लाभ मिला है। मगर उपमंडल अधिकारी ने 7 सितंबर 2020 की रिपोर्ट में नितिन बत्तरा को फर्जीवाड़े के लिए दोषी बताया और रिपोर्ट उपायुक्त को सौंप दी।
कमेटी ने दी चेतावनी, कर दिया माफ
उपायुक्त ने आगामी कार्रवाई के लिए लेखा अधिकारी व सहायक जिला न्यायवादी की टीम गठित कर दी। टीम ने अपनी टिप्पणी में लिखा कि कर्मचारी ने जेबीटी का कोर्स पूरा नहीं किया और न उस कोर्स से कोई लाभ लिया है। उसने सरकार को कोई वित्तीय हानि नहीं पहुंचाई। कर्मचारी का कामकाज भी संतोषजनक रहा है। इसी रिपोर्ट के आधार पर उपायुक्त ने नरमी बरती। कर्मचारी को यह चेतावनी दी गई कि वह भविष्य में ऐसी गलती न करे। यदि उच्च शिक्षा प्राप्त करनी है तो विभाग से पूर्व अनुमति लेनी होगी।
कार्रवाई होनी चाहिए : शिकायतकर्ता
शिकायतकर्ता राजकुमार ने दोबारा शिकायत भेजकर मांग की है कि कई कर्मचारी ड्यूटी पर रहते हुए भी गैर हाजिर रहते हैं। इस तरह दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई न होने से गलत कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है। इसलिए मांग की है कि कर्मचारी पर कार्रवाई होनी चाहिए।