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जिला परिषद चेयरमैन पर कार्रवाई नहीं, हरसमय पोर्टल से एफआईआर भी गायब

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जिला परिषद के चेयरमैन राजेश कसवां के खिलाफ दर्ज पुलिस केस में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पुलिस के रवैये पर अब सवाल भी खड़े होने लगे हैं। वजह यह है कि राजेश कसवां के खिलाफ कोर्ट की कार्रवाई में बाधा डालने के आरोप में केस दर्ज हुआ था मगर पुलिस ने एफआईआर को सरकारी पोर्टल पर अपलोड तक नहीं किया है। नियमानुसार दुष्कर्म व छेड़छाड़ जैसे मामलों के अतिरिक्त हर एफआईआर की प्रति सरकारी पोर्टल हरसमय पर अपलोड करनी होती है मगर उपरोक्त घटना को लेकर दर्ज एफआईआर नंबर 60 हरसमय पोर्टल से गायब है जबकि इसके बाद वाली तमाम एफआईआर अपलोड हैं। बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान का आरोप है कि पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है।
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जिला परिषद कार्यालय के एक हिस्से में कोर्ट के लिए जगह दी हुई है। यहां पर नाबालिग आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की सुनवाई होती है। 5 फरवरी को कोर्ट में कार्रवाई चल रही थी। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान जिला परिषद चेयरमैन राजेश कसवां, लेखा अधिकारी दलीप व एक अन्य व्यक्ति आए और कोर्ट की कार्रवाई में बाधा डाली। विवाद यह था कि जिला परिषद कार्यालय के सामने जज की गाड़ी खड़ी थी और उक्त लोगों ने जज की गाड़ी हटाने के लिए कहा। इसी पर विवाद हो गया और रीडर राजकुमार की शिकायत पर पुलिस ने धारा 186, 228, 353 व 34 आईपीसी के तहत केस दर्ज कर लिया। मुकदमा नंबर 60 सिटी थाना में दर्ज है।
बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सुशील बिश्नोई ने कहा कि कोर्ट की कार्रवाई में बाधा डालना साधारण विवाद नहीं है। यह कोर्ट की गरिमा और सम्मान से जुड़ा मामला है। इस मामले में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। इससे समाज में गलत संदेश जाता है। यदि कार्रवाई न हुई तो वह इस मामले में हाईकोर्ट को पत्र लिखेंगे।
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मेरे हिसाब से एफआईआर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की हुई है। यदि नहीं की गई, तो मैं इसका पता लगाऊंगा कि क्यों अपलोड नहीं है। इस मामले में जांच चल रही है। -सुरेंद्र कंबोज, प्रभारी, सिटी थाना, फतेहाबाद।
ये है विवाद की वजह
वकीलों के मुताबिक नाबालिग बच्चों के खिलाफ दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए अलग कोर्ट चलती है। उसके लिए सप्ताह के एक या दो दिन निर्धारित किए जाते हैं। उस कोर्ट में एक साधारण कार्यालय की तरह माहौल रखना होता है इसलिए न्यायिक परिसर से दूर कोर्ट लगाई जाती है ताकि नाबालिग बच्चों को कोर्ट के माहौल से दूर रखा जा सके। फिलहाल जिला परिषद भवन में ही यह कोर्ट चलती है और प्रशासन ने जगह दी हुई है। कोर्ट में शोर न हो इसका भी ध्यान रखना होता है। इसी भवन में जिला परिषद कार्यालय है। जिला परिषद सदस्य इस बिल्डिंग पर एकाधिकार चाहते हैं यही विवाद की वजह है।
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