फोरलेन बाईपास के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन मालिकों ने किसान संघर्ष समिति के बैनर तले प्रधान महेश मेहता की अध्यक्षता में इकट्ठा होकर बाईपास पर चल रहे निर्माण कार्य को रुकवा दिया। जमीन मालिकों ने सरकार और एनएचएआई के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया।
किसानों ने बताया कि 14 जून को कोर्ट द्वारा बस्ती भीमा, फतेहाबाद व खान महोमद के मुआवजा बढ़ाए जाने की फैसले की कॉपी मिलने के बाद किसानों में फिर से रोष की लहर पैदा हो गई। किसानों ने बताया कि कोर्ट ने मात्र 25 लाख रुपये अवार्ड राशि में बढ़ोतरी की है, जोकि अन्य गांवों से काफी कम है। किसानों ने बताया कि वे खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उनकी जमीन दो भागों में बंट गई है और प्रशासन ने बढ़ा हुआ मुआवजा भी उनके खातों में नही डाला है।
किसानों ने बताया कि सरकार ने बाईपास के लिए उनकी जमीन अधिग्रहीत की थी, लेकिन सरकार की तरफ से उनका 70 प्रतिशत सलेटियम, टयूबवेल ढाणियों और पेड़ों का मुआवजा बाकी था, जिसका किसानों ने सरकार से बाजार भाव के हिसाब से मुआवजा देने की मांग की थी। किसानों ने बताया कि धांगड़ की जमीन का मुआवजा लगभग एक करोड़ 93 लाख रुपये के हिसाब से दिया, जबकि फतेहाबाद शहर के साथ लगती जमीन का मुआवजा लगभग 51 लाख रुपये के हिसाब से दिया। किसानों ने मुआवजे की मांग बढ़ाने को लेकर छह माह तक बाई पास पर धरना दिया था।
जब प्रशासन और एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आरके राठी ने किसानों को आश्वासन दिया था कि दो महीनों में मुआवजा बढ़ाकर उनको भुगतान कर दिया जाएगा। उनके इस आश्वासन के बाद किसानों ने धरने को समाप्त कर दिया था। किसान संघर्ष समिति ने प्रशासन से मांग की है कि फैसले के 15 दिन बीत जाने के बाद भी बढ़ी हुई अवार्ड राशि किसानों के खातों में नहीं डाली गई है। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने उनकी अवार्ड राशि उनके खातों में नहीं डाली, तो वे पूरे परिवार सहित फोरलेन पर आकर बैठ जाएंगे।