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Fatehabad News: शहर की चार संस्थाएं नगर परिषद के साथ पकड़वाएंगी पशु

Wed, 13 Aug 2025 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद में हिसार-सिरसा रोड पर घूमते हुए बेसहारा पशु। संवाद
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फतेहाबाद। नगर परिषद प्रशासन ने शहर में बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए रेवाड़ी की एजेंसी को ठेका दे रखा है। एजेंसी करीब डेढ़ साल से पशु पकड़ रही है लेकिन हालात जस के तस हैं। वीरवार सुबह 5 बजे से शहर में पांच संस्थाएं नगर परिषद प्रशासन का पशु पकड़वाने में मदद करेंगी। सात दिनों तक ये संस्थाएं बेसहारा पशुओं को सड़कों से पकड़वाएंगी और इन्हें नंदीशाला और गोशाला में मार्किंग के साथ छोड़ा जाएगा। अभियान में जिंदगी, अखंड भारत सेवादल, पाव एंड प्रिंट एनीमल सिक्योरिटी ट्रस्ट, श्रीश्याम गो सेवा समिति का योगदान रहेगा।
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शहर में बेसहारा पशुओं के झुंड के कारण हादसों की आशंका के चलते जिंदगी संस्था के अध्यक्ष हरदीप सिंह के नेतृतव में संस्थाएं जिला नगर आयुक्त संजय बिश्नोई से मिली थी। बैठक में अधिकारियों ने कहा कि पशु पकड़े जा रहे हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से दोबारा पशु शहर में छोड़े जा रहे है। चार पशु पकड़े जाते है तो रात के समय 10 छोड़े जा रहे है। संस्थाओं के पदाधिकारियों ने कहा कि बड़े स्तर पर सात दिन तक अभियान चलाया जाएगा और शहर से बेसहारा पशुओं को पकड़ा जाएगा। इसके लिए डीएमसी ने सहमति दी और वीरवार सुबह 5 बजे से अभियान शुरू करने का फैसला लिया गया है। आरटीओ कार्यालय के पास से ये अभियान शुरू होगा।
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एजेंसी को प्रति पशु 920 रुपये के हिसाब से भुगतान किया
नगर परिषद ने वर्ष 2024 की शुरुआत में रेवाड़ी की एजेंसी को शहर से बेसहारा पशुओं को पकड़ने का ठेका दिया था। करीबी एक हजार पशु पकड़ने का एक साल में दावा किया गया। प्रति पशु 920 रुपये के हिसाब से भुगतान किया गया। इस साल नगर परिषद प्रशासन ने 10 फीसदी बढ़ाकर इसी एजेंसी को ठेका दे रखा है। करीब 1012 रुपये प्रति पशु के हिसाब से ठेका दिया गया है।
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यहां रहता है पशुओं का जमावड़ा
शहर के भट्टू रोड, रतिया रोड, भूना रोड, बीघड़ रोड, शिवालय मार्केट के सामने, जवाहर चौक क्षेत्र में पशुओं का जमावड़ा होता है। शहर के जगजीवनपुरा क्षेत्र में वर्ष 2023 में पशुओं के झुंड ने गली में खेल रहे बच्चे को उठाकर पटका था। इसके बाद पार्षदों ने मुद्दा उठाया तो नगर परिषद ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन टेंडर सिरे चढऩे में भी 6 माह का समय लग गया था।
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शहर में बेसहारा पशुओं को पकड़ने का अभियान जारी है। संस्थाएं भी प्रशासन का सहयोग करना चाहती है, इससे बड़े स्तर पर अभियान चलाकर पशु पकड़े जा सकेंगे।
- राजेंद्र सोनी, ईओ, नगर परिषद
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