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जय जवान-जय किसान का नारा किसने दिया, बच्चे बोले, बेरा कोनी, मास्साब ने कहा-सुभाष चंद्र बोस

Fri, 26 May 2017 11:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/फतेहाबाद
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जय जवान-जय किसान का नारा किसने दिया था, एक करोड़ में कितने जीरो लगते हैं। ये वो प्रश्न हैं शुक्रवार को निरीक्षण में शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर हरचरण सिंह छोकर ने जिले के सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करते हुए बच्चों और अध्यापकों से पूछे।
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लेकिन हैरत की बात ये है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे और मास्साब दोनों ही इन सवालों का जवाब नहीं दे पाए। उनके अध्यापक तो इससे भी बढ़कर निकले, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के अध्यापक राजेश कुमार ने जय जवान-जय किसान का नारा देने वाले का नाम नेता जी सुभाष चंद्र बोस बताया। अध्यापकों की ये स्थिति देखकर एकबारगी तो खुद शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर हरचरण सिंह छोकर भी हैरान रह गए। हालांकि मीडिया की मौजूदगी के चलते उन्होंने अध्यापकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सबके सामने तो कुछ नहीं कहा, लेकिन बाद में सबकी जमकर क्लास ली गई।

अध्यापक के गलत जवाब को सुनकर खुद सकपका गए डिप्टी डायरेक्टर
स्कूलों में निरीक्षण के दौरान उन्होंने एक कक्षा के बच्चों से कई प्रश्न पूछे। इस दौरान ही उन्होंने बच्चों से पूछ लिया कि देश को जय जवान-जय किसान का नारा किसने दिया। पूरी कक्षा में से एक भी बच्चा जवाब देने के लिए खड़ा नहीं हुआ, तो किसी ने बुदबुदाकर कहा, बेरा कोनी। डिप्टी डायरेक्टर की भौंहें तन गई। इसके बाद डिप्टी डीईओ साहब ने यही सवाल वहां खड़े अध्यापक पर दागा तो उन्होंने जो जवाब दिया, उसे सुनकर डिप्टी डायरेक्टर हरचरण सिंह छोकर ने अपना सिर पकड़ लिया। अध्यापक ने कहा कि जय जवान-जय किसान का नारा नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने दिया था। वास्तव में ये नारा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने दिया था। इसके बाद उन्होंने बच्चों से पूछा कि एक करोड़ में कितने शून्य आते हैं, सकपकाए बच्चे इसका भी जवाब नहीं दे सके।
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खराब रिजल्ट वाले सरकारी स्कूलों को भेजेंगे नोटिस
इधर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्कूलों के निरीक्षण में कई खामियां दिखी तो उधर जिला शिक्षा विभाग ने भी खराब रिजल्ट वाले स्कूलों के प्रति नजर टेढ़ी कर ली है। उपजिला शिक्षा अधिकारी दयानंद सिहाग ने साफ तौर पर कहा कि विभाग खराब रिजल्ट वाले स्कूलों की सूची तैयार कर रहा है और जिन स्कूलों का रिजल्ट खराब रहा है। उन्हें नोटिस भेजकर खराब रिजल्ट का कारण पूछा जाएगा। अगर कारण संतोषजनक नहीं रहा तो संबंधित स्कूल के मुखिया के खिलाफ कार्रवाई होगी।


पहले तो बच्चों से इन सवालों के जवाब की उम्मीद थी। लेकिन अध्यापक की ओर से भी गलत जवाब आना वाकई चिंताजनक है। इस बारे में अन्य अधिकारियों से बात करूंगी, आजकल अध्यापकों की खुद पढ़ने की आदत छूट रही है, ये गलतियां इसी कारण से होती हैं। जल्द ही इस बारे में उचित कार्यवाही की जाएगी।
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संगीता बिश्नोई, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद।
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