सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के साथ बच्चों को दूध देने वाली सीएम की घोषणा में अधिकारी ही पानी मिला रहे हैं। सीएम ने बीते साल 16 दिसंबर को फतेहाबाद में आयोजित एक जनसभा में इसका ऐलान किया था, लेकिन चार माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अभी तक फतेहाबाद में ही इसकी शुरुआत नहीं हो सकी है, बाकी प्रदेश तो दूर की बात है। दूसरी ओर शिक्षा विभाग के अधिकारी अब इस मामले में रिपोर्ट भेजने का बहाना कर अपना पल्ला झाड़ना चाहते हैं।
200 एमएल दूध रोजाना देने का किया था ऐलान
16 दिसंबर 2016 को प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर फतेहाबाद के बीघड़ रोड स्थित कम्युनिटी सेंटर में पहुंचे थे और उन्होंने ऐलान किया था कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले सभी बच्चों को मिड-डे मील में 200 एमएल दूध रोजाना दिया जाएगा। लेकिन अब शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ही इस मामले का स्टेटस नहीं पता। जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारी कहते हैं कि उन्होंने इस मामले की रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दी थी लेकिन अभी तक कोई लिखित आदेश नहीं आया है।
जिले में सवा लाख बच्चे मिड-डे मील के हकदार, रोजाना है 14800 लीटर दूध की जरूरत
सीएम की घोषणा को ही आधार माना जाए तो अकेले फतेहाबाद में पहली से लेकर आठवीं कक्षा तक के बच्चों को मिड-डे मील दिया जाता है। इस सत्र में पहली से आठवीं तक फतेहाबाद जिले में तकरीबन 74 हजार के करीब विद्यार्थी हैं। ऐसे में सरकारी स्कूलों को प्रतिदिन 14 हजार 800 लीटर दूध की आवश्यकता है। अब दूध की यही मात्रा ही शिक्षा विभाग के गले से नहीं उतर रही। दरअसल शिक्षा विभाग को समझ नहीं आ रहा कि 5.16 पैसे प्रति बच्चे वाले मिड-डे मील के खर्च में रोजाना 200 एमएल दूध का खर्च कैसे निकाला जाए। इसी के चलते अप्रैल से शुरू होने वाली इस योजना का अभी तक कोई अता-पता ही नहीं । ऐसे में सीएम की ये घोषणा भी ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है।
मुख्यमंत्री जी के फतेहाबाद आने के बाद उनके पास प्रपोजल आया था जो उन्होंने 7 दिन बाद ही रिपोर्ट भेज दी थी। पूरे प्रदेश में यह योजना एक साथी ही शुरू होगी।
दयानंद सिहाग, उप जिला शिक्षा अधिकारी