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Fatehabad News: 95 साल से लगातार हो रही फतेहाबाद की चिल्ली वाली रामलीला

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फतेहाबाद में रामलीला का अभ्यास करते कलाकर
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फतेहाबाद। फतेहाबाद की पुरानी तहसील चौक में स्थित श्रीराम सेवा समिति धर्मशाला में अंग्रेजों के जमाने से ही रामलीला का मंचन किया जा रहा है। यह रामलीला आसपास के क्षेत्रों की सबसे ऐतिहासिक रामलीला है और लगातार 95 सालों से रामलीला चल रही है। रामलीला के लिए कलाकार व वॉलंटियर एक माह पहले से तैयारियां आरंभ कर देते हैं। इस बार 18 अक्तूबर से रामलीला का मंचन आरंभ होगा।
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फतेहाबाद की पुरानी तहसील चौक में होने वाली रामलीला पूरे क्षेत्र में चिल्ली वाली रामलीला के नाम से प्रसिद्ध है। इस रामलीला की शुरुआत 1928 में पंडित सूरजभान ने की थी। तब संसाधन कम थे, लेकिन पंडित सूरजभान व उनके साथियों ने कड़ी मेहनत की और 95 साल से यह रामलीला लगातार चल रही है। रामलीला के आयोजन में आज तक कोई व्यवधान नहीं पड़ा और लोग भक्ति भाव से इसको देखते हैं। रामलीला के कलाकारों के लिए दिल्ली से स्पेशल पोशाकें लाई जाती हैं। पहले दिन गणपति पूजन के बाद भगवान श्रीराम का जन्म और दशहरे तक रावण वध तक का मंचन किया जाता है। रामलीला में सबसे अधिक लोकप्रिय दृश्य चाची ताड़का वध, सीता स्वयंवर, लक्ष्मण-परशुराम संवाद, भगवान हनुमान का अवतार व हनुमान द्वारा वाटिका को नष्ट करना है। इन दृश्यों को लोग बड़े शोक से देखते हैं।



120 लोगों की है टीम, एक माह पहले से तैयारियां होती हैं आरंभ

रामलीला की तैयारियां एक माह पहले आरंभ कर दी जाती है। इस दौरान रामलीला के कलाकार अपने डॉयलाग आदि की रिहर्सल करते हैं। रामलीला के डायरेक्टर विनोद गर्ग नानू उनको डॉयलाग बुलवाते हैं। दूसरे ग्रुप के सदस्य रामलीला की स्टेज की सजावट व अन्य कामों को देखते हैं।
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कोट
पिछले 95 सालों से रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। यह क्षेत्र की ऐतिहासिक रामलीलाओं में से एक है और क्षेत्र में सबसे पुरानी है। इस रामलीला की काफी मान्यता है और दूर दराज से भी लोग यहां पर आते हैं।
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-विनोद गर्ग नानू, डायरेक्टर, चिल्ली वाली रामलीला
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