परिवार नियोजन अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की ओर से नसबंदी के लिए महिलाओं को प्रेरित किया जाता है लेकिन नसबंदी के दौरान कई केसों में महिलाएं गर्भवती हो जाती हैं। ऐसे केसों में मामला कई बार कोर्ट तक भी पहुंच जाता है। इन सबसे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग फैमिली प्लानिंग इंश्योरेंस स्कीम के तहत गर्भवती होने वाली महिलाओं को 30 हजार रुपये तक राशि देगा। लेकिन इससे पहले औपचारिकताएं पूरी करनी होगी।
फैमिली प्लानिंग के तहत महिलाएं नसबंदी का आपरेशन करा लेती हैं ताकि आगे और बच्चा न हो। लेकिन कई केसों में नसबंदी आपरेशन के बावजूद महिलाएं गर्भवती हो जाती हैं। चिकित्सकों के अनुसार जिले में ऐसे मामले में साल में 15 से 20 केस सामने आ जाते हैं। नसबंदी आपरेशन कराने के बावजूद गर्भवती होने पर लोग इस मामले को कोर्ट तक ले जाते हैं।
किसी कार्यवाई से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने फैमिली प्लानिंग इंश्योरेंस स्कीम के तहत 30 हजार रुपये की कंपनसेशन राशि प्रदान करेगा। इसके अलावा नसबंदी आपरेशन कराने के बाद अगर महिला की 7 दिन में मौत हो जाती है तो उसे 2 लाख रुपये और अगर 8 दिन से दो महीने तक मौत होती है तो 50 हजार रुपये मुआवजा राशि के रूप में मिलेंगे।
ये औपचारिकताएं करनी होगी पूरी:
क्लेम करने वाली महिला के पास नसबंदी प्रमाण पत्र होना चाहिए। उसके बाद उसे आवेदन फार्म सीएमओ कार्यालय में जमा कराना होगा। जिसके बाद कमेटी आपरेशन रिकार्ड वेरीफाई करेगी। सीएमओ कार्यालय में पांच ऐसे मामले आए हैं जिनमें स्वास्थ्य विभाग नसबंदी के बाद गर्भवती होने पर 30 हजार रुपये का क्लेम देगा।
महिला नसबंदी कराने के बाद कई बार गर्भवती हो जाती हैं। ऐसे केसों में किसी प्रकार की अनावश्यक कोर्ट केस से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार फैमिली प्लानिंग इंश्योरेंस स्कीम के तहत मुआवजा राशि दी जाएगी। शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय में पांच महिलाओं को यह राशि दी जाएगी।
- डॉ. मुनीष बंसल, डिप्टी सिविल सर्जन फतेहाबाद