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गेहूं में मोल्या सूत्रकृमि की समस्या पर पाया गया काबू

Tue, 28 Feb 2017 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
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गेहूं की फसल में मोल्या सूत्रकृमि की जांच करते कृषि वैज्ञानिक। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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 चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के अधीनस्थ कार्यरत कृषि विज्ञान केन्द्र, ढाणी बीकानेरी फतेहाबाद के वैज्ञानिकों की मेहनत रंग लाई है और फतेहाबाद व भट्टू ब्लाक में गेहूं में मोल्या सूत्रकृमि की समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सका है।

केंद्र के सूत्र कृमि विशेषज्ञ डॉ. सरदूल मान और सूत्रकृमि विज्ञान विभाग हिसार से आए वरिष्ठ सूत्र कृमि वैज्ञानिक डॉ. रामवीर कंवर ने जिले के फतेहाबाद और भट्टू ब्लाक के 15 गांवों खाराखेड़ी, ढांड, किरढ़ान, भट्टू, सूलीखेड़ा, शेखुपुर, गदली, ढाबी खुर्द, ढिंगसरा, भोड़ियाखेड़ा, धांगड़, बड़ोपल, कुम्हारिया, काजलहेड़ी, भोड़ा होशनाक आदि के 50 गेहूं के खेतों का निरीक्षण किया।
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निरीक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने पाया कि पिछले वर्षों की अपेक्षा इन दोनों ब्लाकों में गेहूं में मोल्या सूत्र कृमि की समस्या कम पाई गई। 50 खेतों में से 9 खेतों में मोल्या सूत्रकृमि की समस्या देखने को मिली लेकिन इन खेतों में भी गेहूं की जड़ो पर मादा सूत्र कृमि की संख्या आर्थिक कगार से कम पाई गई।

इस दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र फतेहाबाद सूत्र कृमि विज्ञान विभाग से मिलकर पिछले 7 सालों से इन दोनों ब्लाकों के विभिन्न गांवों में सूत्रकृमि चेतना दिवस, मोल्या सूत्रकृमि खेत दिवस, प्रक्षेत्र परीक्षण, अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन लगाकर किसानों में जागरूकता फैला रहा है।

    केन्द्र के सूत्रकृमि विशेषज्ञ डा. सरदूल मान ने बताया कि अभी तक केन्द्र द्वारा इन दोनों ब्लाकों के विभिन्न गांवों में 23 ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए गए जिसमें करीब 2 हजार किसानों ने भाग लेकर इस समस्या के बारे में विश्वविद्यालय द्वारा इजात की गई नवीनतम तकनीकें अपनाकर इस समस्या को काबू पाया। किसानों ने मोल्या सूत्रकृमि ग्रस्त क्षेत्रफल में गेहूं की बजाय सरसों लगाकर न केवल समस्या पर काबू पाया बल्कि सरकार द्वारा चलाई जा रही तिलहन को बढ़ावा देने की योजना को भी अपनाया है।
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नतीजतन वर्ष 2009 में जिले में सरसों का क्षेत्रफल 8700 हैक्टेयर था जोकि इस वर्ष 2016-17 में 14200 हैक्टेयर हो गया है। यह क्षेत्रफल वही बढ़ा है जहां गेहूं में मोल्या सूत्रकृमि की समस्या देखने को मिलती थी। डा. मान ने बताया कि सभी किसान जानते हैं कि मोल्या सूत्रकृमि गेहूं व जौं में नुकसान करता है। फसल कहीं-कहीं पर पीली हो जाती है। फुटाव कम होता है। बालियां कमजोर निकलती हैं जिससे की पैदावारी में भी कमी आ जाती है।

 
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