मुकेश खुराना । प्रदेश के सभी जिला अस्पताल जल्द ही ऑनलाइन होने जा रहे हैं। अधिकतर जिलों में ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी भी हो चुकी है, लेकिन इन सभी के बीच कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां पर अभी काम लटका पड़ा है। इसमें फतेहाबाद का सिविल अस्पताल भी शामिल है। सिर्फ दो कमियों ने फतेहाबाद के सिविल अस्पताल को ऑनलाइन होने से रोक रखा है। सर्वर और यूपीएस सिस्टम चालू न होने से फतेहाबाद का सिविल अस्पताल भी पिछड़ों में शामिल हो गया है। एडिशनल चीफ सेकेट्री की मीटिंग के बाद सीएमओ डॉ. अशोक चौधरी ने संबंधित कंपनी के कर्मचारियों को फटकार लगाई है। उन्होंने कर्मचारियों से जल्द काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सरकार के आदेशों के बाद फतेहाबाद के जिला अस्पताल में पिछले चार से पांच महीनों से ऑनलाइन सिस्टम करने का काम चल रहा है। अस्पताल के प्रत्येक ओपीडी कक्ष से लेकर लेबोरेट्री और रजिस्ट्रेशन रूम तक पाइपें व तारें बिछाने का काम पूरा हो चुका है। इसके साथ ही डॉक्टरों और स्टाफ को भी ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
लेकिन सर्वर और यूपीएस सिस्टम चालू न होने से फतेहाबाद का सिविल अस्पताल ऑनलाइन नहीं हो पाया है। स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल चीफ सेकेट्री ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से जिले के सभी सीएमओ की मीटिंग ली। मीटिंग में कंप्यूटाइज्ड न होने वाले अस्पतालों के सीएमओ की खिंचाई भी की गई और एक अगस्त से पहले पूरा काम निपटाने के आदेश दिए। फतेहाबाद के सीएमओ डॉ. अशोक चौधरी के अनुसार अस्पताल को कम्प्यूटराइज्ड करने का काम यूनाइटेड हेल्थ ग्रुप इंफॉरमेशन सेंटर को दिया गया है, लेकिन यहां पर अभी तक सर्वर और यूपीएस सिस्टम चालू नहीं हुआ है। जिस वजह से अस्पताल ऑनलाइन नहीं हो पाया है। सीएमओ ने मीटिंग के बाद कंपनी के कर्मचारियों की क्लास लेते हुए जल्द काम निपटाने के आदेश दिए।
62 कंप्यूटर करेंगे काम:
सिविल अस्पताल में 62 कंप्यूटर कंपनी की तरफ से पहुंचे, लेकिन उन्हें अभी तक हैंड ओवर नहीं किया गया है। अधिकारियों की मानें तो रजिस्ट्रेशन कक्ष से लेकर लैब तक सब काम ऑनलाइन ही होगा। मरीज जैसे ही रजिस्ट्रेशन कक्ष में पर्ची कटवाएगा, उसका रिकार्ड साइट पर ऑनलाइन हो जाएगा। मरीज को पर्ची दी जाएगी, जिसमें नंबर होगा और वह डॉक्टर के पास जाएगा। डॉक्टर उस नंबर के आधार पर उसका रिकार्ड दर्ज कर लेगा। रिकार्ड में मरीज की बीमारी और दी गई दवाइयां दर्ज होंगी। ऐसा ही लैब और दवाइयों में होगा। इसका फायदा यह होगा कि मरीज को फाइलें और पर्चियां लेकर भटकना नहीं पड़ेगा। मरीज प्रदेश के किसी भी अस्पताल में जाएगा तो नंबर के आधार पर डॉक्टर उसका सारा रिकार्ड देख लेगा।
आधार कार्ड को ही दे सकते हैं यूनिक नंबर:
मरीज को यूनिक नंबर देने में किसी प्रकार का संशय न रहे। इसको लेकर आधार कार्ड को ही मरीज का यूनिक नंबर देने पर विचार चल रहा है। अगर यह सिस्टम सिरे चढ़ जाता है, तो मरीजों को फायदा मिलेगा।
सभी काम पूरे हो चुके हैं। सिस्टम को चालू करके भी देख लिया है, उसे पंचकूला से भी एक बार जोड़कर देख लिया था। यूपीएस और सर्वर शुरू न होने के कारण अस्पताल कंप्यूटराइज्ड होने में दिक्कत आ रही है। मैंने संबधित कंपनी के कर्मचारियों को बुलाकर कहा दिया है कि हर हाल में जल्द काम पूरा करें। उम्मीद है कि 10 दिन में सभी काम को पूरा कर लिया जाएगा।
डॉ. अशोक चौधरी
सिविल सर्जन फतेहाबाद