नोटबंदी को लगभग एक महीने पूरा होने वाला, लेेकिन बैंकों के बाहर लगी कतारें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बैंकों में कैश की कमी से जनता परेशान है, कर्मचारियों के वेतन और पेंशनधारियों को पेंशन के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
बुधवार को स्टेट बैंक ऑफ पटियाला और केनरा बैंक के बाहर उपभोक्ताओं में काफी धक्कामुक्की भी हुई। भूना में पीएनबी का गेट जबरदस्ती बंद करने का प्रयास किया। बैंककर्मी कैश की कमी से खुद परेशान हैं। इस सारे मामले में ब्रांच मैनेजरों की भूमिका संदेह के घेरे में आ रही है।
बुधवार को नोटबंदी के एक माह बीत जाने के बाद भी लाइन कम नहीं हुई। बैंक खुलने से पहले ही केनरा बैंक और स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में सैकड़ों लोग लाइन में लग गए। धक्कामुक्की के बाद लोगों में काफी गालीगलौज भी हुई। स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में ब्रांच मैनेजर की गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण लोग गुस्से में दिखे।
केनरा बैंक के बाहर लाइन में लगे राम सिंह ने बैंक प्रबंधक पर गंभीर आरोप लगाए। उसका कहना है कि बैंक प्रबंधक अपने चहेतों को पैसा दे रहे हैं उधर हरियाणा बिजली पेंशन वेलफेयर ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों पर नाजायज तंग करने का आरोप लगाया है। पेंशनर्स संघ के अध्यक्ष भारद्वाज ने कहा कि बिजली निगम ने पेंशनधारियों के 7 करोड़ रुपये जमा करा दिए हैं लेकिन एसबीआई के अधिकारी अब पेंशनधारक कर्मचारियों को सरकार से लड़ाना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एसबीआई के अधिकारियों ने पेंशनर्स के खातों में अब तक पेंशन जमा नहीं की है।
उधर, वरिष्ठ नागरिक परिषद ने भी बैंक कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी को पेंशन नहीं मिली और ना ही किसी अधिकारी के पास कोई जवाब है। वरिष्ठ नागरिकों व महिलाओं के लिए बैंकों के बाहर अलग से लाइन की कोई व्यवस्था नहीं है। लीड बैंक मैनेजर सीताराम सोनी ने कहा कि धीरे-धीरे व्यवस्था ठीक हो जाएगी। फिलहाल कैश की कमी है।