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एक महीना बीता स्कूलों में नहीं पहुंची किताबें

Tue, 26 Apr 2016 11:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद
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शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए लाख दावे करने वाले शिक्षा विभाग सत्र के पहले महीने में ही फेल साबित हो रहा है। नए सत्र को शुरू हुए 26 दिन बीत चुके हैं लेकिन सरकारी स्कूलों में अभी तक किताबें ही नहीं पहुंची हैं। ऐसे में अंदाजा लगा सकते हैं कि विद्यार्थी किस तरह की पढ़ाई स्कूल से करके लौट रहे हैं। मई में होने वाली दो महीने की मासिक परीक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं कि विद्यार्थी किस तरह से ये परीक्षा दे पाएंगे। बुक्स के न आने के अलावा स्कूलों में सेलेबस तक नहीं पहुंचा है। जिसके चलते सुबह स्कूल पहुंचने वाले विद्यार्थी हाथ पर हाथ धरे दोपहर को वापस लौट आते हैं।
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 2016-17 का शिक्षा सत्र अप्रैल में शुरू हो गया। दाखिले को लेकर भी पूरा प्रचार-प्रसार किया गया कि ज्यादा से ज्यादा दाखिले किए जाएं। विभाग की तरफ से दावा किया गया कि पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को  किताबें जल्द ही उपलब्ध करा दी जाएगी लेकिन 26 दिन बीतने के बाद आस में बैठे अध्यापकों व विद्यार्थियों का धैर्य भी टूटने लगा है। अध्यापकों को चिंता सताने लगी है कि मई में होने वाली दो महीने की मासिक परीक्षा की तैयारी कैसे विद्यार्थियों को करवाई जाएगी।
बिन पढ़े वापस लौट रहे विद्यार्थी:
स्कूलों में किताबें न पहुंचने के कारण विद्यार्थी बिन पढ़े ही वापस लौट रहे हैं। विद्यार्थियों को लर्निंग एनहासमेंट प्रोग्राम व कक्षा रेडीनेस प्रोग्रोम के तहत पढ़ाकर खाली छोड़ दिया जाता है।
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नए प्रकाशक के चक्कर में हुई देरी:
शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मानें तो कक्षा प्रथम से आठवीं तक की किताबें एसएसए के तहत दी जाती है। एससीआरटी के द्वारा इस बार सेलेबस बदल दिया गया और प्रकाशक को भी बदल दिया गया है तथा छपाई का ठेका भी इस बार दूसरी पार्टी को दिया गया है। जिसके चलते स्कूलों में पुस्तकें पहुंचने में देरी हो रही है।
अध्यापकों के साथ मजाक, 7 बजे तक स्कूलों में बैठे:
किताबों के चक्कर में स्कूल के अध्यापकों के साथ मजाक किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों को निर्देश जारी किए गए स्कूल शाम 7 बजे तक खुलें रखें। किसी भी समय स्कूल में किताबें पहुंच सकती हैं ।
सरकार को किताबों के मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम की तुलना प्राइवेट विद्यालयों से की जाती है। दूसरी ओर स्कूलों में आधारभूत सुविधाएं भी प्रदान नहीं की जा रही है।
     विकास टुटेजा, जिला प्रधान राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ  
एलईपी व सीआरपी का बहाना देकर समय पर पुस्तकें नहीं दी जा रही हैं। जो सरकार की नाकामी साबित होती है। सरकार घोषणा तो कर देती है लेकिन उन सुविधाओं को समय पर देने में खरी नहीं उतरती।
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  देवेंद्र दहिया, प्रदेश संगठन सचिव राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
मुख्यालय में इस संबंध में बात हुई है। उम्मीद है कि इस महीने के आखिरी तक किताबें स्कूलों में पहुंच जाएंगी।
     दयानंद सिहाग, डिप्टी डीईओ
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