अभी तक संख्या बल के दम पर प्रशासन को दबाने में सफल रहे जाट नेताओं को बुधवार को भीड़ जुटाने में खासा पसीना आया। भीड़ कम जुटी तो जाट नेताओं ने समझौते का रास्ता अख्तियार कर न केवल लघु सचिवालय के बाहर धरना खत्म करने का एलान किया, बल्कि गिरफ्तार जाट युवकों के लिए जमानत अर्जी लगाने की भी हामी भरी।
इससे पहले जाट नेता प्रशासन को दो टूक जवाब दे चुके थे कि वे न्यायिक हिरासत में भेजे गए जाट युवकों को किसी भी हालत में जमानत पर रिहा करवाने की पहल नहीं करेंगे और प्रशासन ही उनको बाहर निकलवाएगा। वहीं, पुलिस कप्तान ओपी नरवाल जाट प्रतिनिधिमंडल को अपनी यह बात भी मनवा गए कि निर्दोष व्यक्ति को नहीं पकड़ा जाएगा, लेकिन दोषी व्यक्ति को बख्शा भी नहीं जाएगा। इस बार रैली को संबोधित करने वाले जाट नेताओं की बोली भी जिला प्रशासन के अफसरों के प्रति सधी हुई ही रही।
सुरक्षाकर्मी ज्यादा दिखे जाटों की भीड़ से
गेहूं कटाई का सीजन जाटों के संघर्ष पर भारी पड़ा। रैली से पहले लगभग 4 से 5 हजार जाटों के जुटने की संभावना रैली के आयोजक लगा रहे थे, लेकिन मंगलवार हुआ इससे बिल्कुल उलट। रैली में एक हजार लोग भी नहीं पहुंचे। एक बार तो ऐसे हालात होते दिख रहे थे कि प्रशासन द्वारा तैनात किए गए पुलिस सुरक्षा कर्मचारियों की संख्या रैली में पहुंचे लोगों से ज्यादा है। भारी संख्या में पुलिस फोर्स देखकर खुद रैली आयोजक भी भौचक्के रह गए। पुलिस प्रशासन के शहर के प्रत्येक इंट्री प्वाइंट पर पुलिस नाका लगा था, जहां आने-जाने वाले वाहनों की वीडियोग्राफी की जा रही थी। लघु सचिवालय के सामने हुडा ग्राउंड के पास भी पुलिस नाके पर पर वीडियोग्राफी करने पर जाटों की कई पुलिसकर्मियों से बहस भी हुई।
एसपी ने वार्ता में तो एएसपी ने फील्ड में संभाली कमान
जाट रैली को लेकर फतेहाबाद पुलिस काफी दिनों से प्लानिंग कर रही थी। बुधवार को इसका असर साफ तौर पर देखा गया। एसपी ओपी नरवाल जहां प्रशासन और जाट प्रतिनिधिमंडल के बीच होने वाली वार्ता की कमान संभाले हुए थे, वहीं अतिरिक्त पुलिस कप्तान गंगाराम पूनिया ने सुबह से ही फील्ड में ड्यूटी संभाल ली थी। एएसपी ने जवानों की टुकड़ियों के साथ कई बार धरनास्थल के चारों ओर मार्च किया। बीच-बीच में आंसू गैस के गोलों एवं दंगा निरोधक दस्ते की जांच पड़ताल करते रहे।
दूसरी ओर, सूत्रों की मानें तो जाट नेताओं और प्रशासन के बीच उपायुक्त कार्यालय में चली वार्ता में भी प्रशासन की ओर से पुलिस कप्तान ओपी नरवाल ने मोर्चा संभाला। एसपी अपनी दलीलों से जाट नेताओं को यह समझाने में कामयाब रहे कि अदालत द्वारा हिरासत में भेजे गए जाट युवकों को अब पुलिस वापस नहीं ला सकती। इसके लिए जमानत ही एकमात्र जरिया है। इसके अलावा उन्होंने जाट नेताओं को यह भरोसा भी दिया कि निर्दोष को तो पकड़ा नहीं जाएगा, लेकिन जांच में दोषी पाए गए आरोपियों को बख्शा भी नहीं जाएगा।
10 मई की दिल्ली रैली के लिए जरूरी था धरना उठाना
गेहूं की कटाई के चलते भले ही जाट रैली में भीड़ कम उमड़ी, लेकिन सूत्रों की मानें तो खुद जाट नेता भी इस धरने को जल्द से जल्द समाप्त करने के पक्ष में थे। इस धरने को खत्म करने के बाद ही वे दस मई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित रैली की तैयारियों में जुट सकते थे। जाट नेताओं को इस बात का भी डर था कि कहीं दिल्ली में संख्याबल कम पड़ गया तो पूरे देश में मलिक गुट के कमजोर होने का संदेश चला जाएगा। इसलिए जंतर-मंतर रैली की बेहतर तैयारियों के लिए ही फतेहाबाद में धरने को जल्द खत्म करने की रणनीति पर ही जाट नेता सोच रहे थे।