पीएम मोदी के महत्वाकांक्षी परियोजना बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की कामयाबी के लिए प्रदेश सरकार दिन रात एक किए हुए है और पिछले दो साल के आंकडे़ देखें तो प्रदेश भर में लिंगानुपात में सुधार देखा भी गया है लेकिन सत्ताधारी भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला के अपने इलाके में ये अभियान ध्वस्त होता दिख रहा है।
टोहाना के गांव फतेहपुरी में लिंगानुपात घटकर महज 583 पर आ गिरा है। हैरत की बात ये है कि इस गांव के लिंगानुपात में ये गिरावट महज दो सालों में ही हुई है। पिछले दो साल में फतेहपुरी गांव में लिंगानुपात आधा रह गया है। 2013 में इसी गांव में लड़कियों की संख्या लड़कों से काफी ज्यादा थी। उस साल 1000 लड़कों के पीछे 12 सौ लड़कियां थी लेकिन अगले ही साल 2014 में इसमें आश्चर्यजनक गिरावट देखी गई और ये आधे से भी नीचे यानी 582 पर आ गिरा।
2015 में ये बढ़कर 583 तो हुआ लेकिन बढ़ोतरी नाममात्र की हुई। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि प्रदेश सरकार ने विशेष आदेश जारी कर जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि फतेहपुरी गांव पर निगरानी रखी जाए और इसमें लिंगानुपात के बारे में होने वाली प्रत्येक गतिविधि के बारे में पूरी रिपोर्ट भेजी जाए।
प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने दिए हैं गांव की निगरानी के आदेश
बीते दिन ग्राम उदय कार्यक्रम के तहत प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव रोशन लाल गांव फतेहपुरी पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने गांव की रिपोर्ट पढ़ी तो उन्हें काफी हैरत हुई। उन्होंने अधिकारियों से इस बारे में विस्तृत चर्चा भी की। लेकिन महज दो सालों में लिंगानुपात में पचास फीसदी की गिरावट उन्हें भी हजम नहीं हुई। इसलिए उन्होंने मौके पर मौजूद एडीसी जेके अभीर को निर्देश दिए कि इस गांव पर प्रशासन की पूरी नजर रहनी चाहिए और लिंगानुपात को सुधारा जाए।
गांव की महिला साक्षरता दर भी शर्मनाक
सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बेटी पढ़ाओ में भी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला के हलके का गांव फतेहपुरी फिसड्डी रहा है। 2011 की जनगणना के मुताबिक गांव की कुल साक्षरता दर भी महज 47 प्रतिशत ही है। इसमें भी अगर सिर्फ महिला साक्षरता दर पर नजर दौड़ाई जाए तो ये आंकड़ा शर्मनाक हो जाता है। ढाई हजार की आबादी वाले गांव में महिलाओं की कुल संख्या तो आधी है लेकिन साक्षरता दर महज 40 फीसदी ही है। इसका मतलब ये हुआ कि गांव की तकरीबन 60 फीसदी महिलाएं अनपढ़ हैं। वैसे पूरे जिले की कुल महिला साक्षरता दर से भी इस गांव की साक्षरता दर तकरीबन 10 फीसदी कम है।
ये है पिछले पांच साल का फतेहपुरी गांव का लिंगानुपात
साल लिंगानुपात
2011 820
2012 950
2013 1200
2014 582
2015 583
क्या कहते हैं गांव के नए सरपंच
'अभी सरपंच बना हूं, इस समस्या के बारे में अधिकारियों से बात करके समाधान के प्रयास करेंगे।
सोमी, सरपंच, फतेहपुरी ।
क्या कहते हैं जिले के मुखिया
'लिंगानुपात को सुधारने के लिए एडीसी जेके अभीर को नोडल अधिकारी बनाया गया है। फतेहपुरी गांव का मामला भी मेरे संज्ञान में है। जल्द ही इस बारे अधिकारियों की एक बैठक बुलाकर इस पर चर्चा की जाएगी।
एनके सोलंकी, डीसी, फतेहाबाद ।
हैरानी जनक है ये आंकडे़, जांच कराऊंगा और हालात सुधारेंगे फतेहपुरी के : बराला
'फतेहपुरी में लिंगानुपात का एक दम से बिगड़ना काफी हैरानी जनक है। ये मामला मेरे भी संज्ञान में है। जल्द ही इस बारे में अधिकारियों से बात करूंगा और मामले की जांच होगी। वजह चाहे जागरूकता की कमी हो, या कोई और, अफसरों के साथ मिलकर फतेहपुरी के हालात सुधारे जाएंगे।
सुभाष बराला, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं टोहाना विधायक ।