फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अपने ही विभाग में अव्यवस्थाओं से जंग लड़ रहे तीन गुरुजी

Mon, 16 May 2016 12:13 AM IST
अमर उजाला/ ब्यूरो, फतेहाबाद
विज्ञापन
स्कूल - फोटो : fatehabad
विज्ञापन
कहते हैं शिक्षक देश के भविष्य का निर्माण करते हैं। उनके द्वारा पढ़ाई गई शिक्षा को ग्रहण करके ही विद्यार्थी सिपाही, अफसर, नेता, बिजनेसमैन आदि बनता है। फतेहाबाद के तीन अध्यापक भी इसी की नजीर पेश कर रहे हैं। शिक्षा विभाग की अव्यवस्थाओं से लड़ते-लड़ते इन अध्यापकों ने ऐसी मिसाल पेश की है कि विद्यार्थियों के साथ साथ साथी अध्यापक भी इनको आदर की नजर से देखते हैं। ये अध्यापक हैं- देवेंद्र दहिया, विकास टुटेजा और राजपाल मिताथल।
विज्ञापन


देवेंद्र सिंह दहिया : बेस्ट टीचर अवॉर्ड से सम्मानित
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश सचिव देवेंद्र दहिया की प्राथमिकता उनके विद्यार्थी हैं। देवेंद्र सिंह दहिया बेस्ट टीचर अवार्ड से सीएम के हाथों सम्मानित हो चुके हैं। शिक्षा विभाग की तानाशाही नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने से कभी पीछे नहीं हटते। दहिया आजकल हिजरावांखुर्द प्राइमरी स्कूल में हेडमास्टर हैं। स्कूल का हरा-भरा लॉन है और उसमें झूले लगे हैं। स्कूल का एक भी बच्चा ड्रॉप आउट नहीं है।

विकास टुटेजा : प्रतियोगिता में पारदर्शिता के लिए लंबा संघर्ष
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विकास टुटेजा को दबंग अध्यापक माना जाता है। हक के लिए अधिकारियों के सामने अड़ जाना उनकी खासियत है। विद्यालय सौंदर्यीकरण प्रतियोगिता में पारदर्शिता के लिए उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी। इसका परिणाम है कि जिले में विद्यालय सौंदर्यीकरण प्रतियोगिता में अब पूरी पारदर्शिता रखी जाती है। इसके अलावा विकास टुटेजा अब नवचयनित जेबीटी अध्यापकों की ज्वाइनिंग की लड़ाई लड़ रहे हैं।
विज्ञापन


राजपाल मिताथल : स्कूल की छत पर शेड लगा दी शिक्षा
राजपाल मिताथल एमसी कालोनी में स्थित प्राइमरी स्कूल में तैनात थे। महज 210 गज में बने इस स्कूल में विद्यार्थियों के लिए तीन ही कमरे थे, जिनमें लगभग 300 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते थे। राजपाल मिताथल अपने मुख्याध्यापक की अगुवाई में साथी अध्यापकों एवं आस पास के लोगों की मदद से स्कूल की छत पर शेड लगाकर पढ़ाई शुरू की।

लेकिन अधिक गर्मी और अधिक सर्दी में उस शैड के नीचे बच्चों को पढ़ाने में दिक्कत महसूस हुई तो बच्चों के लिए अलग स्कूल भवन के लिए लड़ाई छेड़ दी। पूर्व की कांग्रेस सरकार ने पुरानी तहसील की जगह पर स्कूल के लिए दो एकड़ जमीन देने का एलान कर दिया। जब काम शुरू नहीं हुआ तो राजपाल ने फिर अधिकारियों से पत्रव्यवहार शुरू किया। हालांकि, अब उन्हें यहां से हटाकर किसी अन्य स्कूल भेज दिया गया है, लेकिन स्कूल के नए भवन की जंग जारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें