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कंप्यूटर ऑपरेटर्स को नहीं आती हिंदी टाइपिंग

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स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों की योग्यता को लेकर अजीब विवाद सामने आया है। विभाग को सीएम विंडो के माध्यम से शिकायत मिली थी कि आउटसोर्सिंग पॉलिसी के अंतर्गत नियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटरों को हिंदी टाइपिंग नहीं आती।
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इस शिकायत की जांच में एसएमओ ने लिखा कि कर्मचारियों को हिंदी टाइपिंग नहीं आती। मगर बाद में सिविल सर्जन की रिपोर्ट में लिखा गया कि सभी कर्मचारियों को हिंदी टाइपिंग आती है। अब शिकायतकर्ता ने सीएम विंडो में दोबारा शिकायत भेजी है। सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार बिसला ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने राधाकृष्ण को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड को टेंडर प्रक्रिया के बाद वर्क ऑर्डर दिया था। एजेंसी ने 1 जुलाई 2019 को नए कर्मचारी रख लिए और अस्पताल में नियुक्त कर दिया। 11 जुलाई 2019 को पत्र क्रमांक 1176 के माध्यम से फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल के एसएमओ ने सिविल सर्जन को लिखा कि इन कंप्यूटर आपरेटरों को हिंदी टाइपिंग का ज्ञान नहीं है और वे अपना काम करने में सक्षम नहीं हैं। इसी आधार पर सामाजिक कार्यकर्ता ने आरटीआई के जरिये पत्र की प्रति ली और सीएम विंडो में शिकायत भेज दी।
इसके बाद सिविल सर्जन ने एक कमेटी गठित की और रिपोर्ट मांगी। उस कमेटी ने सिविल सर्जन को रिपोर्ट दी कि उन्होंने नवनियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटरों का टेस्ट ले लिया और सभी ऑपरेटर अपने काम में पारंगत हैं। इसके बाद शिकायतकर्ता राजकुमार ने सीएम विंडो में शिकायत दी कि सिविल सर्जन के खिलाफ जांच होनी चाहिए। मगर इसके बाद जांच डिप्टी सिविल सर्जन को सौंप दी। शिकायतकर्ता ने डिप्टी सिविल सर्जन से जांच कराने से मना कर दिया। इसके चलते 29 दिसंबर 2020 को शिकायत खारिज कर दी।
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दोबारा भेजी शिकायत
शिकायतकर्ता राजकुमार ने बताया कि उसने सीएम विंडो में दोबारा शिकायत भेजी है। शिकायत सिविल सर्जन के खिलाफ दी थी कि सिविल सर्जन ने गलत रिपोर्ट बनाई है, लेकिन उस शिकायत की जांच विभाग ने डिप्टी सिविल सर्जन को दे दी। सवाल उठाया है कि कोई अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ कैसे जांच कर सकता है। इसकी जांच किसी उच्च अधिकारी से करवाई जानी चाहिए।
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