एएसपी गंगा राम पूनिया पुलिस कर्मियों को 19 फरवरी को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जागरूक करते हुए।
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गांव ढाणी गोपाल चौपटा पर जाट आरक्षण की मांग को लेकर 72 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठे पांच लोगों को जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म कराया गया। एक अनशनकारी बलबीर दहिया ढाणी डूल्ट को शुक्रवार सुबह चक्कर आ गया था। उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। हालांकि प्राथमिक उपचार के बाद ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। भूख हड़ताल को समिति के सदस्य ओमप्रकाश नैन ने जूस पिलाकर समाप्त करवाया। गौरतलब यह है कि अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने सात मांगों को लेकर 29 जनवरी से ढाणी गोपाल चौपटा पर धरना देना शुरू किया था। शुक्रवार तक 20 दिन हो गए हैं। प्रदर्शनकारी धरनास्थल पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। धरनास्थल पर 72 घंटे के लिए कली राम बिठमड़ा, बलबीर दहिया ढाणी डूल्ट, हंसराज सिवाच गोरखपुर, जगदीश पारता, इंद्र सिंह नैन आदि ने भूख हड़ताल शुरू की थी। जिसका आज अंतिम दिन था। समय समाप्ति के कुछ ही मिनट पहले बलबीर दहिया चक्कर खाकर जमीन पर गिर पड़े थे। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद वह पुन: धरना स्थल पर पहुंच गए।
पांच सौ युवा करेंगे रक्तदान
गांव ढाणी गोपाल पर धरने में शामिल बुधराम ने दावा किया है कि 19 फरवरी को बलिदान दिवस पर पांच सौ युवा रक्तदान करेंगे। उन्होंने कहा कि बलिदान दिवस पर रक्तदान करके जाट समाज के हकों की लड़ाई लड़ने वाले शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि युवाओं को अधिक से अधिक पहुंचने के लिए तीन गाड़ियां मुनादी के लिए लगाई गई हैं। जो गांव-गांव जाकर युवाओं को रक्तदान के प्रति प्रेरित करेगी। वहीं धरने में शामिल होने के लिए लाखों की भीड़ जुटाई जाएगी। उन्होंने बताया कि बलिदान दिवस पर जलपान व भोजन की भी विशेष व्यवस्था होगी।
पुलिस भी हुई सतर्क
एएसपी गंगाराम पूनिया ने शुक्रवार को 19 फरवरी को प्रस्तावित जाट समाज के लोगों का बलिदान दिवस पर भीड़ को लेकर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी कर्मचारियों को दिशानिर्देश दिए हैं। एएसपी ने भूना-उकलाना मार्ग पर यातायात व्यवस्था बहाल रखने के लिए विशेष रूप से पुलिस कर्मियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को कई हिदायतें भी दी हैं। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरह से धरना देकर अपना हक मांगना लोकतंत्र में सबको अधिकार है।