सरकारी स्कूल, ये लफ्ज जेहन में आते ही एक तस्वीर आंखों के सामने उभरती है जिसमें गंदगी भरा वातावरण, गप्पों में मशगूल अध्यापक और अध्यापिकाएं, नियमों को धता बताते कर्मचारी नजर आते हैं, लेकिन अगर आपको पता चले कि एक सरकारी स्कूल है जिसकी साफ-सफाई जिले के बड़े-बड़े निजी स्कूलों को मात देती है, जिसके अध्यापकों की शैक्षणिक योग्यता कॉलेज के लेक्चरर तक को पीछे छोड़ती है और जिस स्कूल में दाखिला लेने के लिए अप्रैल में विद्यार्थियों की लाइनें लगती हैं, तो शायद आपको विश्वास ना हो। हालांकि वास्तव में जिले का एक सरकारी स्कूल ऐसा ही है। हिजरावांखुर्द राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय को जिले के सबसे स्वच्छ विद्यालय का खिताब हासिल है। यकीन मानिए, सिर्फ कागजों में ही नहीं, धरातल पर भी ये स्कूल इस खिताब का ना केवल हकदार है बल्कि सूबे का सबसे सुंदर एवं स्वच्छ स्कूल बनने की दौड़ में सबसे अग्रिम पंक्ति में शामिल है। साथ ही हिजरावांखुर्द का ये राजकीय स्कूल जिले के उन चुनिंदा स्कूलों में से एक है जिनमें एक भी ड्रॉपआउट विद्यार्थी नहीं है।
ब्लॉक और जिलास्तरीय सौंदर्यीकरण प्रतियोगिता में प्रथम, अब स्टेट की तैयारी
मुख्यमंत्री विद्यालय सौंदर्यीकरण प्रतियोगिता में पहले ब्लॉक स्तर और फिर जिलास्तरीय प्रतियोगिता में पहले नंबर पर रहा ये स्कूल सिर्फ साफ-सफाई के लिए नहीं जाना जाता। ये स्कूल जिले के उन चुनिंदा स्कूलों में से है, जहां पर मार्च-अप्रैल माह में नए दाखिलों के लिए लाइनें लगती हैं। साफ-सफाई से मतलब ये नहीं कि रोजाना स्कूल की सफाई हो गई और बात खत्म। सफाई से यहां का मतलब स्वच्छता दिल को छूनी चाहिए। इसके लिए यहां के पौधों तक को सलीके से रखा जाता है। फिर चाहे शौचालय की सफाई हो, या बगीचों की, स्कूल के किसी कोने तक में गंदगी का कण तक नहीं दिखाता।
हर साल बढ़ती है विद्यार्थियों की संख्या, नेट और एमफिल पास हैं लेक्चरार
जी हां, नौंवी कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा में प्रत्येक साल विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ती ही रहती, कभी कम नहीं हुई। विद्यार्थियों की इस मारामारी के पीछे यहां का शानदार स्टाफ एक बड़ी वजह है। हिजरावांखुर्द राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की सफलता के पीछे यहां का उच्च शिक्षित स्टाफ सबसे बड़ी वजह है। 35 स्टाफ सदस्यों में से अधिकतर उच्च शिक्षित हैं और सभी अपने-अपने विषय के गूढ़ ज्ञाता। ये स्कूल फतेहाबाद के उन चुनिंदा स्कूलों में से एक है, जिसके अध्यापक नेट एवं एमफिल पास हैं।
सामाजिक सद्भाव बढ़ाने में भी नंबर एक है ये सरकारी स्कूल
स्कूल प्राचार्य हरमिंद्र सिंह आजाद के नेतृत्व में हिजरावांखुर्द का ये सीनियर सेकेंडरी स्कूल समाज में समानता एवं आपसी भाईचारा बढ़ाने में भी लगातार अग्रसर है। स्कूल की दीवारों पर लिखे नारे एवं समाज सुधारक बातें स्कूल में घुसते ही आगंतुक के दिल में एक अमिट छाप छोड़ती हैं। स्कूल में कहीं भी नजर दौड़ाएं, जो दीवारें खाली हैं, उन पर शौचालय की जरूरत, कन्या भ्रूण हत्या विरोधी नारे आदि सूक्ति वाक्य लिखे गए हैं। इसके अलावा स्कूल के अंदर घुसते ही स्कूल के अपने दस नियम हैं जिनका पालन विद्यार्थी और स्टाफ सभी करते हैं।
एक नजर में विद्यालय
स्थापना वर्ष : 1954
1. वर्ष 2015 में बारहवीं में दो और 2016 में पांच बोर्ड मेरिट।
2. नौवीं से बारहवीं कक्षा तक लगातार बढ़ रही है विद्यार्थियों की संख्या।
3. आसपास के दस गांवों के छात्र ग्रहण करते हैं शिक्षा।
4. स्कूल में 16 लेक्चरार सहित 35 का स्टाफ।
5. चुनिंदा स्कूलों में एक, जिसमें कला, वाणिज्य एवं विज्ञान पढ़ाया जाता है।
6. स्कूल की खुद की नर्सरी है। यहां पौधों को बढ़ाकर स्कूल के खाली मैदान में लगाया जाता है।
7. वर्षा जल संरक्षण व्यवस्था।
8. गणतंत्र दिवस पर एडीसी की झांकी के जरिए मिला पुरस्कार।
9. 2012 में उच्च विद्यालय वर्ग में ब्लॉक में प्रथम स्थान।
10. 2017 में मुख्यमंत्री विद्यालय सौंदर्यीकरण प्रतियोगिता में जिले में प्रथम स्थान।
11. एक भी विद्यार्थी ड्रॉपआउट नहीं।
कुछ इस तरह बढ़ी स्कूल के विद्यार्थियों की संख्या
सत्र विद्यार्थियों की संख्या
2013-14 532
2014-15 585
2015-16 608
2016-17 628
स्कूल को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत की है। समस्त स्टाफ एवं स्कूल प्रबंधन कमेटी ने अपना खुद का सौ फीसदी स्कूल को दिया है। विद्यार्थियों की मेहनत और अध्यापकों की लगन से स्कूल जिले में प्रथम आया है। अब स्टेट अवार्ड जीतने के लिए पूरी तैयारी है।
-हरमिंद्र सिंह आजाद, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, हिजरावांखुर्द ।