बुधवार को सिविल जज विकास गुप्ता की अदालत में एक अनोखा केस आया। इस केस में फतेहाबाद के इंद्रपुरा मोहल्ला निवासी प्रेमो देवी एवं उनके पति राधेश्याम ने याचिका दायर कर अपनी इकलौती पोती की कस्टडी की मांग रखी थी। दरअसल, मामला बहुत अजीब भी है और दिलचस्प भी। अदालत में दायर याचिका में राधेश्याम ने बताया कि उसके दो बेटे थे, जिनकी मौत हो चुकी है। पहला बेटा अविवाहित था जबकि दूसरे बेटे की एक बेटी अनिष्का है। राधेश्याम ने बताया कि उसके बेटे की मौत के बाद उसकी पुत्रवधू मोनिका अपनी बेटी अनिष्का को लेकर मायके चली गई। फिलहाल उसने धांगड़ निवासी सतीश के साथ शादी कर ली है। राधेश्याम ने कोर्ट को ये बताया कि अब उनका कोई वारिस जिंदा नहीं है और उनके पास काफी संपत्ति है। ऐसे में उसकी पोती अनिष्का की कस्टडी उन्हें दी जाए क्योंकि धांगड़ में उनकी पोती की देखभाल सही ढंग से नहीं हो सकती।
वहीं दूसरी ओर राधेश्याम की पुत्रवधू मोनिका ने कोर्ट में आकर बयान दिया कि उसने सतीश के साथ शादी नहीं की है। वह अपनी मर्जी से उसके साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रही है और उसकी बेटी उसके पास सुरक्षित है। मोनिका ने कोर्ट को ये भी विश्वास दिलाया कि वह अपनी बच्ची का लालन-पालन करने में सक्षम है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माननीय जज विकास गुप्ता की कोर्ट ने बुजुर्ग दंपति को बच्ची की कस्टडी देने से तो इन्कार कर दिया लेकिन लिव इन में रह रही मोनिका को आदेश दिया कि वह प्रत्येक रविवार को बच्ची को सार्वजनिक स्थान पर दादा-दादी से मिलवाएगी।