आखिरकार वही हुआ जिसका डर था, फतेहाबाद जिले को लावारिस पशुओं से मुक्त जिला घोषित करने की जल्दबाजी में जिला प्रशासन आखिरी चोट करने से चूक गया। असलियत यह है कि घोषणा के बावजूद सैकड़ों लावारिस पशु अभी भी जिले की सड़कों और गलियों में बेपरवाह घूम रहे हैं। जिले के मुखिया डीसी एनके सोलंकी के नेतृत्व में जिले के सभी आला अफसरों ने मंगलवार को भारी ताम-झाम और आंकड़ों के साथ फतेहाबाद जिले को स्ट्रे कैटल फ्री जिला घोषित किया था। लेकिन बुधवार को जब ‘अमर उजाला’ ने इस ऐलान का जमीनी सच जानने की कोशिश तो हालात सरकारी घोषणा से बिल्कुल इतर दिखे। शहर की एक भी कॉलोनी या वार्ड ऐसा नहीं था जिसमें लावारिस पशुओं को पूरी तरह से हटा दिया गया हो। खुद नगर परिषद प्रधान के वार्ड में सबसे ज्यादा लावारिस पशु दिखे। इतना जरूर है कि प्रयासों से नेशनल हाइवे पर से जरूर लावारिस सांड़ों की संख्या नाममात्र रह गई है।
नप प्रधान के घर के सामने दिखे आवारा पशु, शहर भर में सवा सौ पशु दिखे सड़कों-गलियों में
‘अमर उजाला’ की तहकीकात में शहर का कोई भी वार्ड इस समस्या से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया है। खुद नप प्रधान और कई पार्षदों के घरों के आगे लावारिस पशु बेपरवाह घूम रहे हैं। नगर परिषद प्रधान दर्शन नागपाल के वार्ड में तकरीबन 21 लावारिस पशु घूमते दिखे। उनके खुद के निवास स्थान के बाहर सांड़ घूमता दिखा। शहर की पॉश कॉलोनी समझी जाने वाली एमसी कॉलोनी की लगभग हर गली में लावारिस सांड़ तफरी करते दिखे। एमसी कॉलोनी में लगभग 18 के करीब सांड़ दिखे। खुद वार्ड पार्षद श्वेता बाघेला टुटेजा के निवास के बाहर सांड़ दिखाई दिया। इसके अलावा पार्षद वजीर जाखड़ की गली के बाहर सांड़ घूम रहे थे तो उनके पूरे वार्ड में तकरीबन 15 के करीब लावारिस सांड़ दिखाई पड़े। वार्ड-25 को जाने वाली मुख्य सड़क पर तीन सांड़ एक साथ दिखे तो पूरे वार्ड में इनकी संख्या 17 के करीब थी। पार्षद मनोज नारंग के क्षेत्र धर्मशाला रोड पर तीन, संन्यास आश्रम रोड पर तकरीबन 3 और पूरे वार्ड की गलियों में 13 से अधिक सांड़ घूम रहे थे। अनाज मंडी के लगभग प्रत्येक गेट पर एक-दो सांड़ विचरते दिखे। शिवालय मार्केट के साथ लगती गौशाला के बाहर सड़क पर एक सांड़ मौजूद था। पपीहा पार्क वाले मोड़ पर निर्माणाधीन मल्टीप्लेक्स के बाहर भी तीन सांड़ डेरा जमाए बैठे थे। शहर के अधिकतर वार्डों में जांच के बाद पाया गया कि सवा सौ सांड़ों से अधिक सांड़ शहर भर में अभी भी मौजूद हैं।
प्रशासन के प्रयास सराहनीय, लेकिन आखिरी चोट से पहले ही कर दी जल्दबाजी
डीसी एनके सोलंकी, एडीसी जेके अभीर और अन्य अधिकारियों के नेतृत्व में जिला प्रशासन पूरे दो माह से लगातार लावारिस सांड़ों की समस्या को दूर करने के प्रयास में जुटा है। कई गांवों में नंदीशाला और अन्य प्रयास करके लावारिस सांड़ों की समस्या को खत्म किया गया है लेकिन सरकार की तय सीमा से एक महीने पहले जिले को स्ट्रे कैटल फ्री घोषित करने की जल्दबाजी में प्रशासन शहर को संभालना भूल गया। हालांकि डीसी एनके सोलंकी ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में ये कहा था कि मंगलवार देर रात तक शहर के इक्के-दुक्के सांड़ भी बाहर नहीं रहने देंगे। हालांकि ‘अमर उजाला’ की पड़ताल में यह संख्या इक्का-दुक्का नहीं बल्कि सैकड़ों में थी।
रतिया में अभी भी सड़कों पर घूम रहे नंदी, नंदीशाला बीते दिन ही हुई तैयार
फतेहाबाद जिले को लावारिस सांड़ों की समस्या सेे मुक्त घोषित करने की जल्दबाजी में प्रशासन रतिया के हालात को भी देखना भूल गया। यहां लावारिस सांड़ों से दुर्घटना के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। सबसे ज्यादा मौतें भी यहीं हुई हैं, लेकिन रतिया को भी लावारिस सांड़ों की समस्या से मुक्त बताया गया था। इसके लिए मंगलवार शाम भी लावारिस पशुओं को पकड़ा गया लेकिन अभी भी वहां दर्जनों आवारा सांड़ अभी सड़कों पर ही घूम रहे हैं। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाइए कि मंगलवार को ही वहां नंदीशाला का निर्माण हुआ है।
नगर परिषद के कर्मचारी लगातार इस काम में जुटे हैं। शहर में बहुत कम सांड़ रह गए हैं। जो थोड़े बहुत रह गए हैं, उन्हें भी बहुत जल्द नंदीशाला में पहुंचा दिया जाएगा।
-ओपी सिहाग, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, फतेहाबाद ।