फतेहाबाद। जिले के किसानों को अनुदान राशि पर मिलने वाला बीज पिछले दो वर्षों से नहीं मिल रहा है। वहीं, इस बार भी किसानों को ढैंचा का बीज अप्रैल माह में वितरित किया जाना था। हालांकि सरकारी दुकानों पर ढैंचा व मूंग का बीज अब तक नहीं पहुंचा है। ऐसे में किसान सहकारी बीज केंद्राें के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
अगेती फसल मूंग व ढैंचा की बिजाई का समय भी निकल रहा है। मूंग की फसल मात्र 70 से 75 दिनों में पककर तैयार होती है। ऐसे में किसान गेहूं की कटाई करके मूंग की बिजाई कर देते हैं। धान की रोपाई शुरू होने से पहले इसकी कटाई करके किसान एक साल में तीन फसलों की पैदावार लेते हैं। मूंग की फसल जमीन की उर्वरता शक्ति को भी बढ़ाती है।
वहींं, ढैंचा की फसल को 35 से 40 दिनों की होने के बाद जमीन में मिलाकर इससे प्राकृतिक तौर पर हरे खाद प्राप्त की जाती है। खेत में ढैंचा उगाने के बाद अगर किसान जुताई करते हैं तो ढैंचा की जड़ों में मौजूद नाइट्रोजन भूमि को प्राप्त होने से खेत की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है। वहीं, मूंग की खेती भी फायदेमंद होती है। इससे अगली फसल में खाद के कम उपयोग की जरूरत पड़ती है और उत्पादन बेहतर होता है।
मूंग के बीज के लिए जिले के 11,587 किसानों ने किया आवेदन
किसानों को सरकार की ओर से ढैंचा के बीज पर 80 फीसदी अनुदान और मूंग के बीज पर 75 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है। सरकार ने मूंग के लिए 700 क्विंटल बीज वितरित करने का निर्णय लिया है। एक किसान अधिक से अधिक 10 एकड़ भूमि के लिए 120 किलोग्राम प्राप्त कर सकेगा।
इसके लिए जिले के 11,587 किसानों ने 3,743 एकड़ के लिए आवेदन किया है। सरकार की ओर से 7,000 एकड़ का बीज वितरित किया जाना है। वहीं, ढैंचा के लिए 41,000 एकड़ के बीज वितरित करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत 2,856 किसानों ने 22,925 एकड़ भूमि के पंजीकरण करवाया है। ढैंचा के लिए प्रति एकड़ 12 किलोग्राम बीज वितरित होना है। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार की ओर से जमीन की उर्वरता शक्ति को बढ़ानेे और मूंग व ढैंचा के रकबे को बढ़ाने के लिए बीज वितरण करने का पोर्टल खोला गया था। बीज वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए विभाग किसानों को ओटीपी के माध्यम से बीज वितरित करेगा।
किसानों को ढैंचा व मूंग का बीज अनुदान पर वितरित किया जाना है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऐसे में जल्द ही बीज उपलब्ध करवा दिया जाएगा। ढैंचा और मूंग की बिजाई के लिए अभी समय है। वहीं, इस मूंग की फसल का रकबा बढ़ने की उम्मीद है।
- डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, जिला कृषि एवं कल्याण विभाग।